Ramashankar Roy 'शंकर केहरी'

Comedy


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Ramashankar Roy 'शंकर केहरी'

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बीबी से दोस्ती

बीबी से दोस्ती

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आपको तो मालूम ही होगा आजकल कोरोना काल चल रहा है और इसमें स्थपित मान्यतावों और नियमो की प्रासंगिकता बदल रही हैं ।पाँचों उंगलियाँ एकत्रित होकर ताकतवर मुठी बनती हैं ।लेकिन कोरोना काल मे अलग अलग रहकर ही हम लडाई जीत सकते हैं । आज के पहले ऐसा कभी कोई कल्पना भी नही कर सकता था ।

आज की तारीख में अगर आपका दुश्मन भी ललकारे तो बाहर नही जाने की सलाह दी जा रही है और उदाहरण भी रामायण से दिया जा रहा है ।बाली , सुग्रीव के ललकार पर घर से बाहर निकला और मारा गया ।इस मुसीबत से भी सकारात्मक प्रेरणा लेने की सलाह दी जा रही है । जब सुग्रीव सभी बंदरों को सीता की खोज पर भेज रहे थे तो उनको पृथ्वी के कोने कोने की भौगोलिक स्थिति की जानकारी दे रहे थे । उनका ज्ञान देखकर राम भी प्रभवित थे ।उन्होंने पुछा मित्र सुग्रीव आपको सब जगह की भौगोलिक स्थिती की इतनी सटीक जानकारी कैसे है ?फिर सुग्रीव ने बताया की यह सारा ज्ञान उनको बाली के डर से छुपने के लिये माकूल जगह की तलाश करने मे प्राप्त हुआ है ।अतः लॉकडाउन की अवधि का उपयोग अपना ज्ञान बढाने या संबंध को प्रगाढ़ बनाने में करना बुद्धिमानी है ।

मैने भी सोचा लगे हाथ चलो बीबी से दोस्ती कर लेते हैं । अपनी बीबी को अपना दोस्त बना लेते हैं क्योंकि कम से कम इकीस दिन तो दोस्तों से मिलना नही हो पायेगा । सैद्धान्तिक स्तर पर यह बात बहुत उम्दा लगी और मैने इसे व्यवहारिक दुनिया मे आजमाने का निर्णय लिया ।सबसे पहले तो मैंने बीबी को कहा देखो हमलोग अब एक दोस्त की तरह रहें और उसकी शुरुआत इससे करते हैं कि आपस में जी कहकर संबोधित करना बन्द करो ।फिर हमलोग ने एक साथ बैठकर इंडोर गेम्स जैसे लूडो और चेस साथ मे बैठकर खेलने लगे । इस खेल में कभी कभी बच्चे भी शामिल हो जाते ।

ऐसा लगने लगा जैसे हमारी फैमिली बॉंडिंग काफी स्ट्रांग हो गई है । "सुनते हो जी" "सुनिए जी " एवं "बोलो जी "का सम्बोधन जैसे ही सुनो ,देखो में बदला मेरे घर का पावर बैलेंस ही बिगड़ गया । मेरी अब कोई सुनता ही नही ।लेकिन धीरे धीरे पत्नी के साथ दोस्ती मजबूत होती महसूस हो रही थी अतः छोटी मोटी अनदेखी चल जाती थी क्योंकि दोस्ती में तो यह सब चलते रहता है ।

एक रोज बात बात मे मैं यह भूल गया कि कोरोनाकाल की मजबूरी में बना यह प्रगाढ़ मित्र मेरी बीबी भी है । मैने उससे अपने बचपन और जवानी के दिनों के उन पन्नों को का राज खोल दिया जिसको जानने वाला कोई दोस्त आजकल मिलता नहीं ।बातों का सिलसिला आगे बढ़कर वर्तमानकाल मे पहुंच गया और उसी आवेग मे मैने अपने तत्कालिक सफल और असफल प्रयासों का भी जिक्र कर दिया ।

गलती से उसकी खास सहेली का भी जिक्र आ गया जो मेरे चलते उसकी सहेली बनी बैठी थी । इस बात का रहस्योद्घाटन अगर किसी दोस्त के साथ होता तो वो लोग चटकारे लेते, ना ना प्रकार के सुझाव देते अपने अनुभवों का चूर्ण बनाकर मुझे पिला देते या इस संबंध में छुपे खतरे से आगाह करते ।लेकिन बीबी रूपी दोस्त ने तो रौद्र रूप धारण  कर लिया और मेरी और अपनी उस सहेली का कुछ भी उधार नहीं रखा ।

आप मेरी स्थिति का अनुमान तभी लगा सकते हैं अगर आपने भी बीबी को दोस्त बनाने की गलती की होगी ।मुझे मेरी दोस्त बनी बीबी से बचावो !!!

अब पता चला की कोरोना काल हो या सामान्य काल बीबी को बीबी ही रहने दो दोस्त बनाने या समझने की गलती मत करो ।



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