Kumar Vikrant

Comedy

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बिछड़े साथी चमेली सीरीज भाग-१

बिछड़े साथी चमेली सीरीज भाग-१

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प्यारे लल्लू,

आशा है मॉरीशस में तुम वैल सैटल हो गए हो? लड़कियों की चप्पलो से पिटी खोपड़ी पर कुछ बाल भी उग गए होंगे, चार दिन पहले मक्खन लाल आया था, जुए में जीते पैसे तुमसे वसूलने के लिए, मरने-मारने को तैयार था बड़ी मुश्किल से पीछा छुड़ाया। 

यार तुम तो मॉरीशस भाग गए और हमें छोड़ गए इस नामुराद मोहल्ले में, हर आदमी आकर तुम्हारा नाम लेकर चार गाली दे जाता है। पिछले हफ्ते बल्लू ने ऐसे लोगो से परेशान होकर उन्हें तुम्हारा मॉरीशस वाला मोबाइल नंबर दे दिया, लेकिन बाद में पता लगा की वो नंबर परमानेंट बंद हो चुका है, यानि तुमने वो नंबर भी बदल दिया है। खैर उसके बाद हम दोनों को जो खरी-खोटी सुननी पड़ी, उसका जिक्र तो बेकार है। 

यार मुझे पता चला है की हड़प बैंक वाले तुम्हे ढूंढते फिर रहे है, बाते तो यहाँ तक हो रही है कि तुमने पंद्रह लाख का लोन पहले वाले मनहूस मकान मालिक के घर के फर्जी कागज बनाकर ले लिया था और अब बैंक वाले उसके पीछे लगे है, पुलिस भी बैंक वालो के साथ आयी थी, ये तो तुमने अच्छा ही किया, बहुत परेशान करता था सा.......न तो लेट घर में घुसने देता था न देर तक लाइट जलाने देता था। अच्छा हुआ हमने वो मकान छोड़ दिया था, नहीं तो तुम्हारी इस करतूत का कुछ असर हम पर भी पड़ता। वैसे मनहूस तो ये मकान मालिक भी है, इसे सबक सिखाएगा बल्लू।

यार तुम्हारी एक हरकत बिलकुल पसंद नहीं आयी, कुछ दिन पहले बाजार में चमेली मिली थी, मुन्ना पहलवान के साथ, बता रही थी की कैसे तुमने उसके साथ प्रेम की पींग बढाकर मुन्ना पहलवान के साथ उसका ब्रेक अप कराने कोशिस की, ये बात तो बिलकुल गलत थी अपन लोगो में तय हुआ था की हम सब महिलाओ की इज्जत करेंगे, लेकिन तुम बाज़ न आये। अब भुगतो बेटा मुन्ना पहलवान पलक पांवड़े बिछाये तुम्हारा इन्तजार कर रहा है।

और क्या बताऊं यार, मै और बल्लू तेरे बिना कितने अकेले पड़ गए है, होटलो में खाने के वांदे है, तुम्हारा उधार चुकाए बगैर कोई खाना खिलाने को तैयार नहीं है। पान वाला तो उसकी दुकान के सामने से गुजरते ही कुत्ते की तरह काटने को दौड़ता है। 

यार कुछ अपना भी जुगाड़ बना दे हमें भी बुला ले अपने पास मॉरीशस में, यार अब तो हम अजगर करे ना चाकरी ...........वाला लाइफ स्टाइल छोड़ने को तैयार है। जरूरी होगा तो कुछ दिन मेहनत-मजदूरी भी कर लेंगे।

देख भाई मुझे तेरा मॉरीशस का पता तो मालूम नहीं इसलिए ये चिट्ठी मैं झम्मन उस्ताद के अड्डे के पते पर भेज रहा हूँ, तूने जाते-जाते उसका पता दे दिया था मुझे। चिट्ठी तुझे जरूर मिल जायेगी, चिट्ठी मिलते ही जुगाड़ में लग जाना हमे मॉरीशस बुलाने के, नहीं तो बेटे कभी न कभी इण्डिया तो आएगा ही तू। बल्लू ने भी तुझे प्यार भेजा है, वैसे इस काबिल तो नहीं है तू।और ज्यादा नहीं लिखूंगा नहीं तो एयर मेल के चार्जेज बढ़ जायेंगे। 

तेरा बिछड़ा यार 

मंगू

421, गली बताशे वाली,

बूरा बाजार, हलवाई हट्टा, महबूब गंज, आशिक नगर l 



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