भूतहा बस भाग 18
भूतहा बस भाग 18
नरेंद्र अपने रुतबे से जितने भी लोगों का बदला लेना था वह उसकी व्यवस्था करता है, अधिकतर लोग तो खुद ही बहुत पश्चाताप कर रहे थे और वह सब अपनी गलतियों का अहसास कर दुखी थे, जब उन्हें पता चला की उनके बच्चे अभी भी भटक रहे तो वह उन्हें मुक्ति दिलाने की बात करते हैं।"
बाबा कहते है, " सभी लोग अपने परिवार के साथ आश्रम पर पहुंचो और वहाँ पर हम उन सभी का विवाह भी कराएंगे और सभी की आत्मा की मुक्ति के लिए अनुष्ठान करवा देंगे।"
एक सप्ताह बीत चुका था, बस रात में चल रही थी, सभी भूत और चुड़ैल नलिनी को घेर लेते हैं।"
सोनिया कहती हैं, " तुमने अपने भतीजे को बाहर निकला दिया अब दोनों ही भूल गए, हम उन्हें नहीं छोड़ेंगे।"
नलिनी कहती हैं, " शुरू हो गया तुम लोगों को भूतियापा, अरे हमने क्या कहा है, सभी की इच्छा पूर्ण करनी है, कुछ लोगों का बदला लेना है तो वह एक दिन में तो नहीं कर सकते है, और रही बात धोखा देने की तो अगर उन्होंने धोखा दिया तो सबसे पहले मैं अपनी हाथों से अपने भतीजे का गला दबाऊंगी और जिसे भी उसका खून पीना होगा पी ले।"
कंडक्टर कहता है, " सही कह रही हैं नलिनी, जितना आसान तुम लोग समझ रहे हो उतना आसान नहीं है, और अभी तक हमें ऐसा कोई संदेह भी नहीं हुआ की वह लोग भी धोखा दे रहे हैं, ,!!
रूपेश कहता है, " दोनों ही अच्छे हैं वह हमारा काम जरूर करेंगे, बस हमें इस बस से मुक्ति मिल जाए।"
आश्रम में सभी लोग जमा होने लगते हैं, सभी लोग मिलकर खर्चा उठाते हैं, जिनके पास नही है उनका भी खर्चा जो समर्थ थे वह उठते हैं, सभी लोग अलग अलग होकर भी एक परिवार की तरह मिल कर काम कर रहे थे, मुख्य दो लोग ही थे, नरेंद्र और रमेश उन्हीं के हिसाब से सारा कार्य हो रहा था, बाबा अपनी तैयारी कर रहे थे, सिर्फ एक बाकी रह गया था, उन रेपिस्टों का पता नहीं चला था और बिना उन्हें सजा दिए, आगे की करवाई नहीं हो सकती थी।
नरेंद्र और बाबा दोनों ही अपने अपने रिसोर्सेज लगाते हैं, चार रेपिस्ट में से दो तो मिल गए थे, और उन्हें पुलिस पकड़ लेती हैं, बाकी दो लोग कहां थे किसी को पता नहीं था।"
बाबा उन दोनो के लिए एक विशेष पूजा करते हैं, तो वह दोनों रेपिस्ट भी अपने गांव पहुंचते हैं, दरअसल रेप करने के बाद ही वह दोनों घबराकर देश के दूसरे छोर पर चले गए थे और नाम बदलकर मोबाइल नंबर बदलकर रह रहें थे।
बाबा ने पूजा करके उनका दिमाग बदला और वह दोनों अपने गांव आ गए, गांव आते ही पुलिस उन्हें पकड़ लेती है और दोनों अपने अपराध भी स्वीकार कर लेते है।
सभी लोग खुश होते हैं, बाबा कहते हैं, कल अमावस्या हैं और हम लोग उनको मुक्त कराने को सारी प्रक्रियाएं पूर्ण कर देंगे, पर आज रात सभी का विवाह करवा देते हैं, ।"
सभी लोग अपने अपने बच्चों का फोटो बनवाकर ले आए थे, सभी मिलकर विवाह की तैयारी करवाते हैं, कुछ लोग तो रोने लगते हैं की काश वह पहले ही उनको मान्यता दे देते तो यह नौबत ही नहीं आती।
शाम से ही प्रॉपर सबका विवाह करवाते हैं,
सभी लोग की इच्छा थी कि एक बार वह अपने बच्चों को देख ले !!
नरेंद्र कहता है, " बाबा जी यह पॉसिबल है क्या की उन्हें मुक्त कराने से पहले हम एक बार उनको देख ले।"
बाबा कहते हैं, " यह इतना आसान तो नहीं है पर कोशिश की जा सकती है, पर उसके लिए उसी ढाबे पर चलना होगा क्योंकि उनकी बस यहां नहीं आ सकती है।"
नरेंद्र कहता है, " हम ढाबे पर चल देंगे बस एक बार मैं अपनी बहन से माफी मांग लूं।"
बाबा कहते हैं, " में भी अपनी बेटी से मिलकर माफी मांगना चाहता हूं, चलिए आज रात को ही मिलने का प्रयास करते हैं"!!
बाबा सभी की शादी करवाकर, दूसरी पूजा शुरू करते हैं, वह सभी भूतों का आवाहन करते हैं और मंत्र पढ़कर अक्षत रोली सिन्दूर सब हवन कुंड में डालते हैं।"
पहले तो कोई रिएक्शन नहीं मिलता है फिर बाबा कहते हैं, सभी लोग ढाबे पर चलो, वहां से ढाबा मात्रा तीन किलोमीटर था सभी अपनी अपनी गाड़ियों में भरकर जाते हैं, जिनके पास गाड़ी नहीं था उन्हें लाने के लिए दुबारा गाड़ी भेजते हैं।
सभी ढाबा के सामने खड़े होते हैं, ढाबा वाला बंद करने वाला था पर इतनी भीड़ देख वह बंद नहीं करता है, सभी वहीं बैठकर चाय का ऑर्डर देते हैं, कुछ लोग अपने बच्चों के पसंदीदा डिश का ऑर्डर देते हैं।
बस रात में रोड पर चल रही हैं, "रोशन को अहसास होता है की जैसे उसके अंदर अलग सा शक्ति आ गई, इसी तरह का अहसास सभी को होने लगता है तो निशा कहती है, " लगता है उन दोनों ने हमारा काम शुरू कर दिया है, मुझे तो एक अलग सा अहसास होने लगा है।"
उसी समय बस को एक झटका लगता है, सभी को झटके का अहसास होता है, ड्राइवर कहता है, " ऐसा लग रहा है जैसे बस को कोई शक्ति खींच रही है।"
कंडक्टर कहता है, " अरे नहीं यह तो इन्हीं के मां बाप की पुकार है वह एक बार इनसे मिलकर माफी मांगना चाहते हैं।"
बस अचानक एक जगह रुकती है और उसके दरवाजे में प्रकाश आने लगता है, कंडक्टर सभी से कहता हैं, सभी लोग बीस मिनट के लिए बाहर जायेंगे, और फिर वापस आयेंगे।"!
तभी ड्राइवर कहता है, " भाई अपने भी मां बापू आए हैं, चल जल्दी से एक बार दिल भर के देख लें।"
सभी बस से बाहर आते हैं, तो सामने पूरी भिड़ लगी थी, सभी के परिवार वाले अपने अपने बच्चों को पहचान कर उन्हें आवाज देते हैं, सभी भागकर जाते है और उनसे मिलते हैं वह यह भूल जाते हैं की उनके साथ क्या हुआ था, सभी के मां बाप बच्चों से माफी मांगते हैं, नरेंद्र अपनी बहन के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो जाता है और रोने लगता है।
नलिनी उसके हाथ पकड़ कर कहती है, " भईया गलती मेरी भी थी, मैंने तो आपको माफ कर दिया था अब आप भी हमें माफ कर दो, राजेंद्र के भाई आए थे, उनके मां बाप तो उसके जाने के गम में ही कुछ दिनों में ही चल बसे थे।
सभी एक दूसरे से मिलकर खुश होते है, सभी उन्हें खाने पीने का समान देते हैं, भूत और मानवों का मिलन बड़ा ही गजब का था, दोनों ही रो रहे थे, जैसे ही समय होता है, कंडक्टर कहता है " अब समय हो गया सभी चलो अंदर, सभी भूत रोहन और संगीता को आशीर्वाद देते हुए जाते हैं।"
बाबा उनसे कल तक और घूमने के लिए कहते है क्योंकि कल शाम तो उन सबको मुक्त कराना ही था।"
बस में बैठ कर सभी भूत खुश होकर गाना गाने लगते है, नलिनी कहती है, " देखा मेरा भतीजा कितना अच्छा है। सभी हामी भरते हैं ?"
दूसरे दिन रात में बाबा शांति पूजा करवाना शुरू करते हैं, जैसे जैसे जिसकी शांति होती है, बस में से वह गायब होते हैं, सभी खुश होते हैं, एक एक कर सभी को मुक्ति मिलती है, और अंत में ड्राइवर और कंडक्टर को भी मुक्ति मिलती है और बस वहीं गायब हो जाती है, बाबा के हवन कुंड की अग्नि अचानक बहुत तेजी से भभक कर ऊपर को उठती है और कुछ देर में पूरा जल जाता है।
बाबा कहते हैं" उन सभी को मुक्ति मिल गई, अब कोई नहीं बचा और वह बस अब दुबारा नहीं दिखेगी।
सभी बाबा कि जय जय कर करते हैं, सभी कहते हैं यहीं पर रोहन और संगीता की शादी भी कर देते हैं, सभी मान जाते हैं बाबा दूसरे दिन का मुहूर्त निकालते हैं, बाराती के रूप में इतने सारे लोग थे ही, दूसरे दिन रोहन और संगीता की शादी होती है सभी उनको आशीर्वाद देते हैं।"

