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Sanket Vyas Sk

Horror


5.0  

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भूत बंगला.....भाग ५

भूत बंगला.....भाग ५

4 mins 440 4 mins 440

आगे भाग ४ में हमने देखा की पूजा-विधि चालू थी तभी ही बीच में प्राची को धूपसली के धुएँ में आत्मा कुछ दिखाती हैं तो प्राची वहां से खड़ी हो जाती है तो वो तांत्रिक टेन्सन में आ जाते है और अब आगे... 


ऐसा होने पर दोनो तांत्रिक टेन्सन में तो आ जाते हैं और वो चेतन को बारी-बारी कहते है की, "चेतनजी कुछ करके उनको पूजा में साथ में बिठवाओ वरना हम कुछ भी नहीं कर पाएँगे।" मगर उस समय चेतन कहता हैं कि, "कोई दूसरा उपाय बताओ जिससे ये जो हुआ था वो फिर से ना हो, मैने तो बनती कोशिश की ही है, आप जो जानते ही हो।" उस समय प्राची अचानक ही कहने लगती हैं,"चेतन तुम ये दोनो तांत्रिक को यहाँ से तुरंत ही भगा दो, उन्होने ही तुम्हें अभिमंत्रित जल से अपने वश में किया था और ये लोग यहाँ मुझे भगाने नहीं बल्कि तुम्हारी प्राची की बली देने आए है, और कोई लड़की की हत्या करे वो मुझे बिलकुल ही पसंद नहीं" और तुरंत ही प्राची बेहोश हो जाती है। ऐसा प्राची के मुंह से सुनकर चेतन थोड़ा अचंभित हो उठता, शोक में आ जाता है और सभी तांत्रिक ये सब मामला समझ जाते है और वो चेतन पर हमला करने का प्रयास करते है ठीक उसी समय कहीं से चमगादड़ उस तांत्रिक के मुँह पर चिपक जाता है। ये सब मामला देखकर चेतन बहुत ही हैरान हो जाता है मगर वो खुद को स्वस्थ करके अपने मोबाइल से पुलिस को बुला कर दोनो तांत्रिक को उनके हवाले कर देता है। चेतन वहाँ से प्राची को उठाकर सीधा अस्पताल पहुँच जाता है और उसकी ट्रीटमेन्ट करवाने लगता हैं। थोड़ी देर बाद प्राची जब होश में आई तो खुद को अस्पताल में देख चेतन को पूछने लगती हैं, "चेतन क्या हुआ ? मुझे अस्पताल में लेकर क्यों आए हुए हो ? हम तो बंगले में पूजा-विधि करने बैठे थे ना ! और वो बंगले से बुरी आत्मा को निकालने का क्या हुआ ?" चेतन उसे अच्छी तरह से बोलते देख खुश होता है और उसे कहता हैं, "वो आत्मा का कुछ पता नहीं पर तुम को कुछ हो गया था, तुम अजीब तरीके से बातें करने लगी थी जैसे तुम्हारे भीतर से कोई दूसरा व्यक्ति बोल रहा था।" प्राची ये सुनते ही कहने लगती हैं,"तुम क्या ये गलत-शलत बक रहे हो, मेरी तबियत बिगड़ी होगी तभी ही तुम मुझे यहाँ अस्पताल में लाए हो मगर हां पर एक बात सही है की जब हम पूजा करने बैठे थे उस समय मुझे झटका महसूस हुआ था उससे भी पहले मैंने जो धूपसली जल रही थी उसके धुएँ में वो ही वाला चेहरा दिख रहा था जो चेहरा मैं वहां रहने आई तब दिखा था, जो दिखा रहा था की कोई तांत्रिक हैं जो किसी लड़की की बली देने वाले हैं तभी शायद में तभी वहां से खड़ी हो गई थी क्योंकि ऐसे भयानक तरीके से किसी की हत्या हो रही में कैसे देख पाऊँ ! और तो और वो तांत्रिक लोग ऐसा कर रहे थे जो हमारे वहां पूजा करने आये वो भी तांत्रिक ही थे। हमे कुछ बली-शली वाला काम करवाना नहीं है, हमें तो आत्मा से छुटकारा लेना हैं तो फिर ऐसी पूजा मे मैं क्यों बैठूं ? क्या इससे हमे वो आत्मा से छुटकारा मिलेगा ?" वो दोनो प्राची के घर पहुँच जाते हैं और एक रूम में बात करते है तभी अचानक ही प्राची चौक कर कहती है, "अरे अच्छा हुआ जो भी हुआ, मतलब हमने जिसको भगाने पूजा-विधि करवाई वो हमे ऐसे सहाय करने लगी है, मतलब यह अच्छी आत्मा ही होगी, भले ही हमे बुरी दिखती हो।" फिर चेतन उसे जवाब देते हुए कहता हैं,"अरे ये सब आत्मा-शात्मा कुछ नहीं होता, ये सब बातों को छोड़ो और तुम मुझे बताओ की उस बंगले में तुम रहने आओगी या नहीं ? गर जो तुम्हें वहां रहने नहीं आना तो वो में बेचकर हमारे लिए नया मकान ले लूंगा।" जब चेतन प्राची को नया मकान लेने वाली बात करता है तब प्राची एकदम झटके से बोलती है, "पर मेरा क्या होगा ? तुम तो नया घर ले लोगे, मुझे यहाँ अकेला छोड़कर तुम कैसे जा सकते हो ? मैं आपके साथ ही रहूंगा।" प्राची का ऐसा अजीब सा जवाब सुनते ही चेतन के होश उड़ जाते हैं की जो वहां रहने आने को मना कर रही थी आज ऐसा क्यों करने लगी है?" चेतन बहुत ही डर जाता हैं।

                  


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