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निशा शर्मा

Drama


4.8  

निशा शर्मा

Drama


भेदभाव

भेदभाव

6 mins 430 6 mins 430

"और बताओ राजू की अम्मा,कैसी कट रही है ? अरे अब तो तुम कभी बाहर चबूतरे पर बैठी दिखाई ही नहीं देती हो ! वैसे होता तो ये है कि बहू के घर में आ जाने से सासों का घूमना-फिरना ज्यादा बढ़ जाता है मगर तुम्हारे मामले में तो लगता है कि उल्टी गंगा ही बह रही है ?" मोहल्ले की सबसे कुशल तथा स्त्री-सुलभ लक्षणों की माला के हर एक मोती को बड़ी ही कसावट के साथ सुसज्जित किये हुए कलावती बहन जी ने बड़ा ही स्नेह दिखाते हुए एवं संदेहभरी नज़रें या कह लो कि घूरते या टटोलते हुए राजू की अम्मा को ये प्रश्न रूपी तीर मारा ! वैसे यहाँ हमारी कलावती बहन जी का स्वर्णिम इतिहास भी आपको बताना थोड़ा जरूरी है तो कलावती बहन जी मोहल्ले की सबसे वृद्ध और सम्माननीय महिला हैं जिनके द्वारा फैलाई जाने वाली कोई भी सूचना पत्थर की लकीर से तो कदापि कम नहीं समझी जाती है और उसपर उनका तकियाकलाम " तो क्या मैं झूठ बोल रही हूँ " जिसके बाद तो सुनने वाले को लेशमात्र भी शक की गुंजाइश तक रखना भी घोर पाप !

अब कलावती बहन जी की जब इतनी तारीफ़ कर ही दी है तो चलो कुछ कसीदे हम राजू की अम्मा की तारीफ़ में भी पढ़ ही देते हैं !

राजू की अम्मा एक बेहद व्यवहार कुशल महिला हैं, यूं कहने को तो वो सास बन गई हैं मगर उम्र के हिसाब में वो कहीं से भी चालीस वर्ष से एक दिन भी ज्यादा न बैठेंगी और भईया उनकी व्यवहारकुशलता के तो क्या कहने,अपने तवे के समान रंग के राजू के लिए बिल्कुल दूध के रंग की बहू जो ब्याह लायी हैं और भईया बात अगर सिर्फ रंग तक ही सीमित होती तो भी हम शायद इनकी व्यवहारकुशलता पर तनिक संदेह तो कर भी लेते लेकिन यहाँ तो मामला रूप-रंग,गुण, बुद्धि,शिक्षा तथा हैसियत, हर एक पैमाने पर उन्नीस-बीस नहीं बल्कि धरती और आसमान का फर्क रखता था !

राजू की अम्मा, कलावती बहन जी के तीर समान प्रश्न का उत्तर दे पातीं उससे पहले ही उनपर पुनः एक नये तीर का प्रहार हो गया। इस बार कलावती बहन जी नें राजू की अम्मा से बिना किसी लागलपेट के सीधे-सीधे ही पूछ लिया कि क्या वो अपनी नई-नई, अरे मतलब कि चार माह पुरानी बहू से खुश हैं या नहीं ? अरे दिखने से तो लक्षण ठीक-ठाक ही लगे हैं मगर अंदर की माया तो तुम ही जान सको हो,क्यों ? सब कुशल तो है न राजू की अम्मा !

राजू की अम्मा इसके जवाब में बिल्कुल कोमा पेशेंट के माफिक गुमसुम रहीं और वो बस अपनी आँखों में आँसुओं को भरे बड़ी ही दीनहीन बनकर कलावती बहन जी की तरफ़ देखने लग गईं !! इसी बीच राजू की धर्मपत्नी जिसके नाम पर ये सब स्वांग किया जा रहा था,अंदर से किसी महिला के आगमन को भाँपकर दो गिलास पानी और बेसन के लड्डू लेकर आ गई !

रात गहरा चुकी थी। घर के सभी सदस्य निद्रा की गोद में जा चुके थे लेकिन आज राजू की पत्नी की आंखों से नींद कोसों दूर थी। वो बड़ी देर से बस इसी उधेड़बुन में लगी थी कि जबसे वो इस घर में आयी है, उसनें इस घर के किसी भी सदस्य को किसी भी जायज़ या नाजायज़ बात पर कभी भी पलटकर जवाब नहीं दिया, कभी भी सुबह के पाँच बजे से सवा पाँच भी न हुए उठने में उसे और उसके मायके तथा ससुराल की आर्थिक से लेकर सामाजिक तक हर एक परिस्थिति में जमीन तथा आसमान का फर्क होने पर भी उसने न तो कभी स्वयं इन पहलुओं की तुलना की और न ही कभी इस बाबत अपने ससुराल पक्ष में से ही किसी को इस सबका अहसास कराया फिर चाहे वो उसका पति राजू ही क्यों न हो पर इतना सब करते हुए भी आखिर उससे कहाँ और कौन सी कमी छूट गई जो आज उसकी सास की आँखों में एक बाहर की स्त्री के सामने नमी बनकर तैर गई। ईश्वर साक्षी है कि उसके इस घर में कदम रखने के बाद उसकी सास ने कभी जो एक गिलास पानी भी अपने हाथ से लेकर पिया हो ! हाँ आजकल उनके उठने का समय जरूर बदल गया है और हाँ दिन में जबतक वो अपने फेवरेट सीरियल्स के रिपीट एपिसोड्स न देख लें तब तक उन्हें चैन कहाँ ! इसके साथ ही वो दिन में सुबह से शाम तक कई-कई बार छोटी एवं बड़ी दीदी से फोन पर बात करने में भी अपना अधिकतर समय गुजारा करती हैं पर आज उन्होंने इनमें से किसी एक भी बात का जिक्र उस बाहर की महिला के सामने करना जरुरी क्यों नहीं समझा ?

इन्हीं आत्मा को छलनी कर देने वाले अनगिनत प्रश्नों से घिरी राजू की पत्नी को अगले पल अचानक ही अपनी माँ का ख्याल आ गया जिन्होंने अभी पिछले महीने ही अपने हमसफ़र को खोया था और जो ठीक से सिर्फ इसीलिए रोयीं भी नहीं कि उनके एकलौते बेटे को उच्चरक्तचाप की समस्या है तो उनकी बड़ी बेटी को शुगर की बीमारी और उनकी सबसे छोटी संतान यानि कि मैं जिसको शादी के एक माह बाद ही चिकन पॉक्स नें जकड़ लिया जिसके चलते इस बात का ध्यान कि मेरा शरीर अभी कमज़ोरी से उबरा नहीं सिर्फ और सिर्फ मेरी माँ को है। जब सोचती हूँ तो सिहर उठती हूँ कि आखिर कैसी होती हैं ये माँ जो अपने बच्चों की इतनी चिंता करती हैं कि अपने आँसुओं को भी अंदर ही अंदर पी लेती हैं कि इस कारण कहीं उनके बच्चों की हानि न हो जाये और एक ऐसी भी औरत है जिसे ईश्वर की कृपा से कोई दुख-दर्द नहीं पर वो सिर्फ और सिर्फ समाज की सहानुभूति पाने और दूसरे व्यक्ति को समाज की नज़रों में गिराकर स्वयं श्रेष्ठ साबित होने के लिए झूंठे आँसू तक आँखों में भरने से भी कोई गुरेज नहीं करती।

सोच की अत्यंत गहरी होती जा रही खाई में वो डूबती ही जा रही थी कि तभी उसके पति राजू की नींद टूट गई और उसने अपनी पत्नी को यूं आधी रात में जागते हुए देखा तो पूछे बिना न रह सका कि आखिर वो इतनी रात गए क्यों जाग रही है और किस चिंता में डूबी हुई है ?

हालांकि वो अपने पति राजू से हमेशा की तरह ही आज भी कुछ नहीं छुपाना चाहती थी मगर चाहकर भी उसे बस इस ख्याल नें बड़ी ही दृढ़ता के साथ कुछ भी बताने से रोक दिया कि कहीं उस पर भेदभाव का ये आरोप न लगा दिया जाये कि वो अपनी माँ को श्रेष्ठ और अपनी सास को सिर्फ नीचा दिखाने की मंशा से ये सब बातें बना रही है या राजू की माँ पर ये झूठा इल्ज़ाम लगा रही है !

भेदभाव... कौन जाने की भेदभाव उसकी सास द्वारा किया जा रहा था उसके और उसकी ननदों के बीच जिनसे राजू की माँ फोन पर धीमे स्वर में घंटों बातें किया करती थी या फिर वो अपने मन में आज सत्यता का आंकलन करके कर रही थी,अपनी माँ और राजू की माँ के बीच !


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