Akanksha Gupta

Abstract


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Akanksha Gupta

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भार

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स्टेडियम में खचाखच भीड़ जमा थी। उस भीड़ में नयना बिल्कुल आगे बैठी हुई थी। सब तरफ एक ही नाम गूंज रहा था- ‘कीर्ति’

कीर्ति नयना की बड़ी बहन थी। कीर्ति एक एथलीट थीं।भारोत्तोलन के खेल की राष्ट्रीय स्तर की विजेता रह चुकी कीर्ति अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने चुनाव के लिए प्रयास करने जा रही थीं।

कीर्ति मैदान में पहुंच चुकी थी। मैदान में पहुंच कर पहले उसने सबका अभिवादन किया और उसके बाद अपनी बहन नयना की ओर देखा जैसे कि कह रही हो कि अब तुम्हारे सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे।

फिर उसने अपने हाथों पर अस्सी किलो का वजन लिया। उसे धीरे धीरे ऊपर की ओर उठाया लेकिन जब तक उसके हाथ सीधे होते तब तक कीर्ति अपना संतुलन खो चुकी थीं। वो भार उसके हाथों से छूट गया। यह पहला ही राउंड था।

नयना को लगा कि कीर्ति ने जल्दबाजी कर दी। फिर उसे याद आया कि उसने भी तो जल्दबाजी की थीं शादी के फैसले पर।

उसके बाद दूसरा राउंड शुरू हुआ। इस बार कीर्ति को सौ किलो वजन दिया गया था। इस बार कीर्ति ने संभल कर वजन ऊपर उठाना शुरू किया। उसने अपने हाथ पर।


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