बाल मनोविज्ञान

बाल मनोविज्ञान

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राहुल बहुत शैतान है पाँचवी कक्षा में पढ़ता है।पल भर टिक कर नही बैठता सारा दिन धमाचौकड़ी मचा सबकी नाक में दम कर देता है। बच्चों के मन पर अनजाने में कही हुई बात जब मन मे पैठ जाती है तो बड़े होने पर भी वो असर रखती है। राहुल अपनी बहन से बहुत प्यार करता था। सारा दिन साथ खेलना साथ पढ़ना , स्कूल जाना भी साथ-२ होता था। लेकिन एक दिन उसने देखा कि उसकी बहन अलग कमरे में उदास बैठी है। माँ उसे खाना भी वही दे रही थी। जब राहुल ने बहन को खेलने के लिये बुलाया तो उसने मना कर दिया। माँ ने भी राहुल को मना कि की बहन को तगं ना कर और उसे आराम करने दे उसके कमरे में भी नही जाना। राहुल ने माँ से पूछा दीदी को क्या हुआ है ऐसे आपने उसे अलग कमरे में क्यूँ बिठा रखा है। आप उसे किसी सामान को भी छूने नही दे रही है और किचन में भी नही आने दे रही है। तो माँ ने कहा कि तुम्हारी बहन बिमार है तबीयत ठीक नही। तुम जाओ खेलो। 

राहुल ने माँ की बात सुन चला जाता है। 3-5 दिन यही चलता रहता है। 

यही अकसर हर महीने होने लगा तो राहुल को अजीब लगता था कि ये कैसा बुखार है जो हर महीने होता है और दीदी को अलग कमरे में बन्द कर दिया जाता है। अगर उसे बुखार है तो हमे उसका ध्यान रखना चाहिये। जब वो पूछता तो माँ टाल देती कि तुम दूर रहो, लड़के हो अपने काम से काम रखो। जैसे ही राहुल कुछ बड़ा हुआ तो दोस्तो से उसे पता चला कि बहन को कोई बुखार नही था। मासिक धर्म था। जिस तकलीफ़ से वो गुज़रती उसमें मदद करने की जगह अजीब व्यवहार किया जाता। ये बाल सुलभ मन पर बैठी हुई नकारात्मक सोच बड़े होने पर भी उसके मन पर हावी रही। उसे आज तक समझ नही आया कि एक प्राकृतिक कृत्य को गुनाह बना क्यूँ लड़कियों को सजा दी जाती है। और उसे सच क्यूँ नही बताया गया। हमें सही तरीक़े से बातों को बच्चों को बताना चाहिये। जिससे समाज का विकास हो सके। 


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