बाबा ऐसा वर ढूँढो
बाबा ऐसा वर ढूँढो
"अब यू मुँह लटकाने से कुछ नहीं होने वाला समझी, बेकार में बच्ची को इतना सुना दिया, क्या हुआ जो लड़के वालों ने मना कर दिया तो? चलो अब खाना खाओ" सुरेश जी ने अपनी पत्नी रमा जी को कहा|
"मुँह ना लटकाऊँ तो क्या करूँ? तुम्ही बता दो, बोला था कि कुछ भी हो जाये हिल की सैंडल मत उतारना लेकिन क्या मजाल जो मेरी कोई बात सुन ले| खड़ी हो गयी बिना सैंडल के और बता दिया कि मैं सिर्फ चार फुट 11 इंच की हूं। ये कोई बात होती है भला?" रमा जी ने गुस्से में मुँह फेरते हुए कहा|
"अरे भाग्यवान तुम समझती क्यों नहीं हाइट हमारे हाँथ में तो है नही, ना ही मेरी बेटी कोई गाय बकरी जो कही भी किसी के गले बांध दूँ, समझी उसने बिलकुल सही कहा कि विवाह की नींव झूठ की बुनियाद पर नहीं रखते।" सुरेश जी ने कहा
"तो फिर बेटी को बिठाए रहो सारी उम्र घर मे समझे, उसकी उम्र की सभी लड़कियां एक एक बच्चो की माँ बन गयी है। और इसकी अभी शादी भी तय नहीं हुई, तुम्हे क्या समाज में चार औरतों की बात तो मुझे ही सुनना पड़ता है ना" रमा जी ने कहा
अंदर कमरे से राधिका अपनी मम्मी पापा की बाते सुनकर दुखी हो रही थी,पांच साल हो गए थे राधिका के रिश्ते की बात करते करते लेकिन उसकी कम लम्बाई के कारण हर जगह शादी कट जाती। इन सब बातों का असर राधिका पर ये हो रहा था कि अब वो शांत और गुमसुम रहती। पढ़ी लिखी आत्मनिर्भर राधिका की शादी उसके मम्मी पापा के बीच हर रोज घर मे झगड़े का मुद्दा बन गया था
तभी रमा जी की ननद रुक्मिणी का फोन आया ये पूछने के लिए की बात बनी की नहीं| तो रमा जी ने कहा "नहीं दीदी इस बार फिर से मना कर दिया लड़के वालों ने, लोग कहते है कि माँ बाप लंबे हो तो बच्चे भी लंबे होते हैं फिर हम दोनो तो लंबे ही है फिर राधिका कहा से छोटी हो गयी हाइट में, पूरा यू ट्यूब और गुगल खंगाल लिया सब कर लिया लेकिन हाइट नहीं बढ़ी अब क्या करूँ मेरी तो समझ ही नहीं आ रहा"
भाभी मेरी जेठानी के भाई का लड़का तो है लेकिन वो भी लंबा ही है कहो तो बात कर के देखूं, लेकिन लड़का आर्मी में है ।
"अरे दीदी ,लेकिन वो लोग क्या तैयार होंगे है,?वैसे अपनी राधिका तो दूध सी गोरी ,सिर्फ कद ही छोटा है, ना |वो लोग रिश्ते को मना कर दिए तो, रहने ही दो" रमा ने कहा
"भाभी एक बार शांत मन से सोच लो फिर बताना, मेरे हिसाब से मिलने में कोई बुराई नही" कहते हुए रुक्मिणी ने फोन रख दिया
खाने की टेबल पर रमा जी ने ये बात सुरेश जी और राधिका एवम अपने बेटे राजू को बतायी। तो सुरेश जी ने कहा" हाँ अच्छा रिश्ता है लड़का तो पैसे वाला और सुंदर होना चाहिए "
तभी राजू ने कहा"पापा अच्छा होता अगर हम इसके बारे में दीदी से ही पूछ लेते,क्योंकि जिंदगी तो उन्हें ही बितानी है।"
"तू चुपकर बड़ा आया दीदी का चमचागिरी करने" रमा जी ने कहा
तभी सुरेश जी ने राधिका की तरफ देखते हुए कहा"बोलो बेटा तुम इतना शांत क्यों हो,मेरे हिसाब से घर तो ऐसा ही होना चाहिए जो आर्थिक रूप से सम्पन्न और समाज मे जिनका रसूख हो, लोग दूर दूर तक जानते हो, जिससे अगर कल को नौकरी में कुछ ऊपर नीचे हो तो परिवार की संपत्ति ही काम आती है।"
आज पहली बार राधिका ने कहा"नहीं पापा मुझे ऐसा ससुराल नहीं चाहिए जो रसूखदार और धनी हो, बल्कि ऐसा चाहिए जहाँ मेरा सम्मान हो, मुझे प्यार और अपनापन मिले मुझे तो ऐसा लड़का चाहिए।"
रमा जी और सुरेशजी ने एकांत में एक दूसरे से बात की और निर्णय लिया कि मिलने में कोई बुराई नही, नहीं पसंद आया तो मना कर देंगे।
अगले दिन बात हुई,एक सप्ताह बाद लड़के वालो ने कहा"कि हम लड़की देखने आ रहे है।"
इतना सुनते रमा जी खुश हो गयी उन्होंने राधिका को कहा" कुछ भी जो जाए तुम सैंडल नहीं निकलोगी,तुझे मेरी कसम है।"
अगले दिन लड़के वाले आये औपचारिक बातचीत होने के बाद सबने कहा कि राधिका को भी बुलाइये, उनसे भी मिल लिया जाए।
राधिका ने जैसे ही कमरे में प्रवेश किया, उसके पैर लड़खड़ा गए, ये देखते रमा ने अपने सिर पर हाँथ रख लिए और मन ही मन कहा "हे भगवान!ये भी रिश्ता हाँथ से गया"|
5 फिट 11 इंच लंबा चौड़ा अमित जितना देखने मे सुन्दर और आकर्षक था उसका मन भी उतना ही सुंदर था।
पास बैठे अमित ने तुरंत उठ कर राधिका को सम्भाला ते हुए कहा"आप सैंडल निकाल दीजिये, और यहाँ बैठ जाइए, और खुद जाकर सामने के सोफे पर बैठ गया"|
रमा जी की नजरें तो बस राधिका पर ही टिक गयी, और मन ही मन सोचने लगी की अब क्या होगा, एक बार फिर कट गई शादी|
सारी बातचीत होने के बाद अमित के माँ पापा ने कहा"अच्छा भाईसाहब हमलोगों को अब इजाजत दीजिये, घर जाकर हम आपको फोन करके बताते है"|
उनके जाते ही रमा जी राधिका पर गुस्से में बरश पड़ी,ये क्या तरीका था ढंग से चलना भी नहीं आया लड़खड़ा कर लड़के वालों को अपनी हाइट बता दी।
तभी उनलोगों का फोन सुरेश जी के पास आया" उन्होंने कहा"भाईसाहब हमको लड़की पसन्द है, बहुत बहुत मुबारक आपको अब हम समधी बनने वाले है,सोचा घर जाकर बताऊंगा लेकिन हमारी श्रीमती जी को जल्दी थी कि अभी बता दो क्यों इंतजार कराना"|
"जी आपको भी बहुत बहुत बधाई" सुरेश जी ने कहा|
सुरेश जी ने रमा जी से कहा" मुबारक हो आपकी चिंता दूर हो गयी उनको हमारी राधिका पसन्द है।"
रमा इतना सुनते खुशी से झूम उठी और खुशी से राधिका की नजरें उतारने लगी,उन्होंने तुरंत अपनी ननद रुक्मिणी को फोन करके ये बात बतायी"तो रुक्मिणी ने कहा" भाभी!मुझे पता था की हाँ ही होगा क्योंकि उन्हें मैंने पहले ही सच बता दिया था राधिका के बारे में की, उसकी कद काठी छोटी है"|
तो पता है उन लोगो ने क्या कहा"रुक्मिणी, हमे बहु चाहिये सीढ़ी नहीं जिससे घर के जाले और पंखे साफ कराने है,हमे तो ऐसी बहु चाहिए जो खुद भी खुश रहे और हमे भी खुश रखे, लड़की संस्कारी होनी चाहिए बस"|
"भाभी,मेरी भतीजी कोई वस्तु नहीं जिसको बेचने के लिए मुझे प्रदर्शनी लगानी थी, विवाह जैसा संबंध सच्चाई पर होना चाहिए। इसलिए मैंने पहले ही क्लियर बात कर ली थी"|
शादी के दिन जयमाल पर जब सबके सामने अमित ने घुटनों के बल बैठकर राधिका से जयमाल पहनी,तो देखने वाले देखते रह गए। औऱ फुसफुसाते लोग मुँह पर हाँथ धरे देखते रहे|
आज पूरे 4 साल बाद भी कोई उनकी हाइट को लेकर कुछ कहता है तो अमित फटाक से कहते मेरी पत्नी सिर्फ हाइट छोटी है मन नहीं हम तो परफैक्ट जोड़ी हैं अमित जी की तरह|
प्रिय पाठकगण, उम्मीद करती हूं कि आप सबको मेरी ये कहानी पसन्द आएगी। कहानी का सार सिर्फ इतना है कि दुनिया में अगर बुरे लोग हैं तो अच्छे लोग भी है और विवाह जैसा सम्बन्ध कर सच की नींव पर किया जाय तो सदैव सुख दायी होता है। अन्यथा झूठ की नींव पर यही शादी बोझिल और जीवन भर दुख देने वाली भी हो जाती है।
