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Anita Sharma

Tragedy

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Anita Sharma

Tragedy

अतीत का बोझ

अतीत का बोझ

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रमा बेचैन होकर रात के एक बजे अपने कमरे में इधर उधर टहल रही है। परेशानी की बात भी है। उनकी बेटी कविता की पांच साल की बेटी पीहू कहीं खो गई है।

आज शाम को जब कविता अपनी बेटी को लेकर पार्क में गई थी तो जरा सी नजर हटते ही वो गायब हो गई। तब से कविता और उसके पति परेशान होकर उसे खोज रहे हैं। पुलिस में भी कंप्लेन कर दी है। वो भी उसे ढूंढ रहे हैं। दूसरे शहर में होने की वजह से रमा अपनी बेटी के पास नहीं जा पाई, पर मन तो जैसे वहीं था उसका।

अपनी प्यारी बेटी कविता को रमा ने अकेले ही पालपोस कर बड़ा किया है। क्योंकि कविता के पापा जब वो अपनी माँ के कोख में थी तभी चल बसे थे। बचपन में अपनी बेटी पर कोई आंच न आने देने वाली  रमा आज अपने को बहुत बेबस महसूस कर रहीं है। आज उनकी बेटी पर दुखो का पहाड़ टूट पड़ा था और वो उसके पास जाकर उसे ढाढस भी नहीं बंधा पा रही थी।


इतनी रात गये कोई साधन भी तो नहीं मिलेगा। शहर जाने का। तभी उनका फोन बजा......

"हैलो....! हाँ सच में चलो ये तो बहुत खुशी की बात है। भगवान का लाख - लाख शुकर है कि हमारी पीहू मिल गई। बहुत चोट लग गई। ओह.... पर वो बहुत बहादुर है। उनका पूरा ख्याल रखना तुम। ठीक है सुबह बात करेंगे। "

कहते हुये रमा ने फोन काट दिया। और बेड पर बैठ सीधे जग से गटगट करके बहुत सारा पानी पी लिया।  ये उनकी बेटी का फोन था जिसने पीहू के मिलने और उस बहादुर महिला के बारे में बताया था ।

जिन्हे ट्रेन में पीहू को ले जाने वाले लोगो पर शक हो गया था। तो उन्होंने अपना शक दूर करने को कई सवाल किये जिससे बौखला कर उन गुंडों ने उनपर हमला कर दिया। जिससे उन्हें चोट लग गई। पर डिब्बे में शोर होने से वो अपनी जांन बचा कर भाग गये । और पीहू को वहीं छोड़ गये। उन्होंने पीहू को पुलिस को सौप दिया। और पुलिस अब पीहू को लेकर कविता को सौपने आ रही है।


इन सब में आज रमा इतने सालों बाद भी अपने आप को दोषी समझ रही है। आज जो पीहू के साथ हुआ वो उस बच्ची के साथ भी हुआ होगा । कविता की तरह उसके माँ बाप भी ऐसे ही तड़पे होंगें , या क्या पता आज भी तड़प रहे हो .... ??

ये सोचते हुये रमा अपने अतीत में खो गई। शादी के बाद वो अपने पति के साथ मातारानी के दर्शन करने जा रही थी। तभी वो लोग ट्रेन में उसके सामने वाली सीट पर बैठे थे। जो खुद को पति ,पत्नी और उस दुध मुंही बच्ची को अपनी बेटी बता रहे थे।

पर उस बच्ची को देखकर लग नहीं रहा था कि वो उनकी बेटी है। क्योंकि उन पति पत्नी तो मैले से कपड़े पहने थे। और चेहरे से भी बुरे लग रहे थे। जबकि बच्ची मखमली कंबल में लिपटी गोरी चिट्टी प्यारी सी डॉल के जैसी थी।

मन में शक का कीड़ा बुलबुलाने पर रमा ने उनसे बात करने की कोशिश की। पर उनकी तरफ से कोई रिस्पोंस न मिलने पर उसने अपने पति से भी इस बारे में बात की। तो उन्होंने रमा को समझाते हुये कहा.....


"हर माँ बाप अपने बच्चों को खुद से अच्छा ही रखते है। तो ऐसा कुछ नहीं है तुम कुछ ज्यादा ही सोच रही हो। "


पति की बात सुन रमा ने दिमाग से शक का कीड़ा निकालने की कोशिश की, पर पूरे रास्ते उस बच्ची का बिना कुछ खाये पिये सोते रहना ,नॉर्मल तो नहीं था।

खैर ट्रेन अपनी गति से चलती रही। ट्रेन जैसे ही एक बड़े शहर के आउटर पर खड़ी हुई । तो वो दोनों बच्ची को लेकर वहीं उतर गये। उनके जाने के दस मिनिट बाद ही पुलिस उन दोनों को खोजती वहाँ आ गई।  रमा का शक सही साबित हुआ था। वो बच्ची चुरा कर ही भागे थे। रमा पुलिस को सब सच बताने बाली थी कि उसके पति ने उसका हाथ पकड़ उसे पीछे करते हुये पुलिस से उन दोनों के बारे में अभिज्ञता जाहिर कर दी। पुलिस के जाते ही रमा ने अपने पति से ऐसा करने का कारण पूंछा तो उन्होंने अपनी परेशानी बताते हुये कहा.....


"मुझे इस पुलिस के झंझट में नहीं पड़ना। तुम तो उनको सच बता देती । फिर कभी उन्हें पहचानने के लिये, तो कभी उनका स्केच बनवाने के लिये पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाते रहो। फिर हम घूमने निकले है। इससब में पड़कर मुझे अपनी छुट्टियां बर्बाद नहीं करनी। "

उनकी ये बात सुनकर बहुत दुख हुआ था रमा को पर वो अपने पति के खिलाफ जा के पुलिस को सच्चाई बताने की हिम्मत ही नहीं कर पाई।

पर उस घटना के बाद न तो रमा मातारानी के दर्शन में मन लगा पाई थी। न हीं उसकी बेचैनी उन खूबसूरत बादियों में जाकर कम हो पाई थी। जिसके परिणाम स्वरूप आठ दिन के घूमने के प्लान को छोड़ वो चार दिन में ही वापिस आ गये थे ।

तब से आजतक वो उस बात को सोचकर घुटती रहती है और आज उस महिला की बहादुरी ने रमा को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया कि ....


"अगर उन्होंने भी पुलिस के चक्कर में फँसने के डर से पीहू को न बचाया होता तो...?

सोचते ही वो पसीने से लथपथ हो भगवान से बस एक ही प्रार्थना कर रही थी कि "अगर मुझे अतीत में जाने का मौका मिले तो मैं अपनी इस गलती को जरूर सुधारुँगी जिसने मेरे जीवन से आत्मिक शांति छीन ली"।

दोस्तों कभी-कभी हमारे साथ ऐसा हो जाता है कि हम किसी डर से सच्चाई छुपा तो लेते हैं, पर उसका बोझ हमारी आत्मा पर इतना होता है कि हमें कभी चैन नहीं मिलता।



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