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Ajeet Kumar

Comedy Drama Others


4.1  

Ajeet Kumar

Comedy Drama Others


अपने अपने मॉडल

अपने अपने मॉडल

12 mins 144 12 mins 144

आजकल मोडलों का खूब शोर है | एक माननीय कहते है - " मेरे जैसा बनाया मॉडल दुनिया के किसी कोने में नही, वो तो आजकल अविष्कारों का श्रेय पश्चिमी लोगो ने ले लिया है नही तो मेरा मॉडल गिनीज बुक में रिकॉर्ड होना चाहिए, देखना एक दिन उन्ही में से कोई चुरा लेगा " | तो दूसरा नेता तड़ाक से जवाब देता है - " अजी हटिये बड़े आये मॉडल मॉडल करने वाले | हमारे मॉडल से लड़ाकर देखिये, कैसे फिस्स हो जाता है आपका मॉडल " | पीछे से समर्थकगण  - " हमारे मॉडल से जो टकराएगा, चूर चूर हो जायेगा "

   मोडलों का इतिहास यूँ तो बहुत पुराना है | शुरू शुरू में भगवान् ने एक मॉडल विकसित कर ये दुनिया बनाई | गीध, सूअर के साथ साथ मनुष्यों को भी शामिल कर लिया | खैर भगवान् का समय ठीक था | जो उस समय मनुष्यों का ध्यान सिर्फ शिकार करने और गुफाओ में रहने पर था | आज भगवान् फिर से ऐसा कोई मॉडल बना कर देखें  फिर देखें कैसी तबाही मचती है | एक जाती समर्थक बोलेंगे - " भगवान् की ये हिम्मत कैसे हुई हमे इन सूअरों के साथ समान मॉडल में बनाने की | हमे एक शुद्ध पृथक मॉडल चाहिए, जिससे हम अपने पूर्वजो के साथ साथ अपने आने वाले पीढ़ियों का उद्धार कर सके " | तो उधर से दूसरी जाती वाले भी राग छेड़ देंगे - " हमारा मॉडल तो सोने का होना चाहिए, जिसे हम खूब सजाकर उसकी बरसी मना सकें " | जातीय मॉडल के ऊपर क्षेत्रीय, प्रांतीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मोडलों की भी मांग बढ़ जाएगी | अगर ऐसा हुआ तो ये दुनिया सिर्फ मोडलों की होकर रह जाएगी |

भगवान् के मॉडल के बाद कुछ समय तक मोडलों का इतिहास सूना रहा | मनुष्य वैसे ही रहे और सूअर भी वैसे ही रहे | मोडलों के इतिहास में मोड़ तब आया जब डार्विनवाद की लड़ाई में जीतकर मनुष्य आगे आये | उन्होंने धीरे धीरे अनेक मॉडल बनाये | हालाँकि सभी मॉडल जाने पहचाने न गये पर वो अपने अपने कामो में लगे रहे |

आधुनिक काल में इन मोडलों की तरक्की दिन दूना रात चौगुनी हुई है | इन्सान ने जहाँ छाती पीटकर भगवान को मात देने की ठान ली है | पर इस चक्कर में हम मोडलों के इतिहास को भूलने लगे थे , जैसे प्रेमी प्रेमिका की आँखों का रस पीकर, अघाकर,  प्रेम का इतिहास भूल जाता है | मनुष्य मॉडलखोर हो गया !

मोडलों के  इसी स्वर्णिम इतिहास को जीवन्त करने का पीड़ा इधर हमारे कुछ महानुभावों ने उठाया है | वो तथाकथित मॉडल बनाते है बिगाड़ते है और दुसरो के मॉडल को गलियाते है | मोडलों के साथ इसी छेड़खानी के कारण मॉडल आजकल आधुनिक मीडिया के चर्चा में बना हुआ है | दुर्भाग्यवश जब वो मॉडल मॉडल करते है कुछ दुर्बुधि बुद्धजीवी प्राणी शोर करने लगते है | वो आरोप लगाते है कि इस मॉडल में कोई दम नही | पर ये आलोचक नही जानते कि किसी इतिहास को जिन्दा रखने के लिए कायदे के मॉडल चाहिए ही नहीं ऐसा करने से निम्नलिखित खतरे है - ' सरकारी खजाने से नेता, मंत्री और उनके सु'फैमिली ( सु'पुत्र के आधार पर )  जो माल उड़ा रहे है वो चला जायेगा, अधिकारीयों का दिमाग व्यय होने का खतरा है जिसे वीर्य की तरह बचाना जरुरी है ताकि वो नये बोगस मॉडल पैदा कर सकें , पुल इत्यादि सही बनने लगे तो जनता संघर्ष भूल जाएगी जो हमारी परम्परा के खिलाफ है इत्यादि " | इतिहास का मर्म है मॉडल  भले खोखला हो, मॉडल का नाम मोडलों के पोस्टर पर जरुर होना चाहिए | आज जब गाँधी और नेहरु को बोगस गलियां मिलती है तो किसलिए ? क्या कोई ऐसा है जो उनके सिधान्तो पर सच में चल सके , नही न ? फिर सोचिये उनका इतिहास कैसे जीवित रहेगा ?  आप किसी भी गाँधी के गालीवादक को देख लीजिये वो पूरी श्रधा, तने फेफड़े, सूखे गले और लाल आँखों से जी खोलकर गलियाते है | उन्हें सुनकर मुझे इत्मिनान हो गया है कि गाँधी बाबा इतिहास में अमर रहेंगे |

पर मैं इस शोर से थोडा परेशान हो गया | एक मॉडल , दूजा मॉडल.. तीजा मॉडल | मैं कितनो का चीर फाड़ करता | हारकर मैंने भगवान् से सहायता मांगी | चूकी  मैं बिलकुल बेसहारा बन चूका था इसलिए भगवान् राजी हो गये और एक दिन सपने में आकर जगह और तिथि बताई |

तय समय पर तय स्थान पहुंच गया और उनका इंतजार करने लगा मुझे पता था जिस देश के नेता सुबह कहकर शाम को आते हो वहां के भगवान के  क्या ही कहने 

पर उन्होंने मुझे निराश नहीं किया  मिनट बाद ही उधर से आते दिखे मैं परेशान हो गया कोई अर्जेंट बात होगी इसलिए ये महाशय इतनी जल्दी आये हैं  पर यहां भी मैं गलत निकला आते ही सच्चे भारतीय की तरह वो रेल मंत्रालय को जी भर गरिया कर चबूतरे पर फ़ैल गए मेरी साँस में जान आयी मैं भी चबूतरे से लगे एक छोटे पत्थर पर बैठ गया 

सपने में तो श्रीकृष्ण आने वाले थे पर आये थे अभिमन्यु |

मैं पूछ बैठा - " वो, आपके गुरूजी पीछे रह गये क्या ? "

वो बोले - " नही नही उनको गोपियों से कुछ काम आ गया था " | मैं मुस्कुराये बिना न रह सका | इस पर उनकी भौंहे चौड़ी हो गयी | फिर जम्हाई लेते हुए

बोले - ' क्या जी क्या परेशानी है आजकल दुनिया में ' |  मुझे लगा या तो  भगवान भी मसखरी करने लगे या जरूर दो पेग मारकर आये हैं 

मैं बोला - 'आंय महाराज इतना सब परेशानी है दुनिया में काहे नहीं एकाध मॉडल बनाकर हल कर देते है सुना है आप मॉडल की कला सुभद्रा माता के गर्भ में ही सिख लिए थे | "

सही कहते हो पर क्या करें अवतरण काल जल्दी समाप्त हो गया मेरा नहीं तो एक क्या मॉडलों की बरसात कर देता | "

यूँ तो मुझे भगवान से बिदकने का अधिकार नहीं था जान हथेली पर रखकर मै  बिदक गया मुझे आश्चर्य हुआ की ये भी भगवान् लोक में नेतागिरी तो नही करने लगे|

 

  तय हुआ कि प्रान्त घूमकर मोडलों की समीक्षा की जाए और तब जाकर किसी निष्कर्ष पर पहुचा जाये | तो सबसे पहले हम मोडलों के मॉडल सौराष्ट्र गये | शायद भगवन को मोडलों की शोर का कोई दूसरा बड़ा सबूत न मिला हो | खैर कौन जाने !

जाते ही वो साबरमती आश्रम में पालथी मारकर बैठ गये |

मैं बोला -" आंय भगवान् हम यहाँ घुमने आये है न ! "

भगवान् ने बड़ी सावधानी से इधर उधर देखा और आश्रम के अंदर खीच कर बोले - " बिहारी हो ? "

मैंने कहा- " आप तो अगमज्ञानी है महाराज "

वो बोले - " वो सब छोडो, अन्दर आ जाओ ,नही तो तुम्हारे साथ साथ हम भी कूटे जायेंगे "

मैं हँसते हुए बोला -" आप नाहक डर रहे है यहाँ ऐसा कुछ नही है "

भगवान् ने इशारा किया | मैंने देखा कि एक मैले कुचैले आदमी जो , एक मैला टीशर्ट पहने हुए था  जिसपर छपी स्त्री मुस्कुरा रही थी और जो हरेक तरह से बिहारीपन में फिट लग रहा था | उसे घेरकर चार पांच आदमी भारतीय शस्त्र यानी लाठी से प्रहार कर रहे थे | मैं देखते ही भगवन के पीछे छिप गया | वो हँसे और बोले - " चलो जी ! चले यहाँ से "

हम वहां से छिपते अहमदाबाद पहुचे | मैं चकरा गया | यूँ ऊँची बिल्डिंग्स, चौड़े सड़क | देखो तो माननीय ने कितना कुछ नही किया फिर भी लोग हैं कि  .. | मैं अभी भक्तिभाव में डूबा ही था कि भगवान् ने मुझे वहां से उठाकर सच्चाई के कड़े पत्थर पर पटक दिया |

हम किसानो के एक छोटे से गाँव में थे | मुझे लगा हालिया घटना की तरह भगवान ने मुझे अहमदाबाद की सड़क पर उठे दिवार के उस तरफ ला पटका है | मैं उत्सुकता वश वो दीवार ढूंढने लगा | पर वो प्रेमी प्रेमिकाओ के बीच टूट चुके लज्जा की दिवार की तरह नजर नही आई | भगवान् समझ गये माजरा क्या है | बोले- " वो प्यारे गोपाल हम सच में गाँव में है | "

मेरा किसानो के साथ उतना ही हमदर्दी बचा है जितना एकतरफा प्यार करने वाले प्रेमियों के प्रति | गोया दूसरा धन, इज्जत और दिल देने को तैयार नही और तुम पिले पड़े हो जान धोकर | खैर,भगवान् के साथ साथ मेरी भी वहां खूब आव्भागत हुई | पूछने पर कोमेंट आया - " मॉडल वोडेल से हमे क्या लेना देना जी , हमे तो अनाज का सही मूल्य मिल जाए, स्वस्थ्केंद्रो में डॉक्टर आ जाए और ये जमीन देशी अंग्रेजन को न चला जाए " | कुल मिलाकर अज्ञानता से भी मॉडल की ही बात हो रही थी | भगवान् प्रसन्न नजर आये | तो दुसरे ही पल बिदक गये | गाँव वाले तैश में आकर अब वहां  की सरकार को गाली देने लगे | महौल बिगड़ते देख हम वहां से खिसकने के बारे में सोचने लगे | जब हम गाँव की पग डंडियों से रवाना हुए तो भगवन का पारा चढ़ा हुआ था | कुछ बुदबुदाये तो मैंने बोला - ' आंय ' वो बोले - " ये आंय वाय करना बंद करो जी तुम | कितने निष्ठुर प्राणी हैं मनुज भी | देखो तो हम तुम्हे मोडलों की नगरी लाये | माना ये प्रान्त पहले भी सम्पन्न थी पर क्या किसी ने मॉडल का नाम देने की जहमत उठाई | फिर किसी भले आदमी को ये उपाय सुझा है तो लोग आज उसी को गलत बताने लगे | तुम्हे तो पता है आज कल मोडलों के इतिहास को जीवन्त रखना कितना मुश्किल हो गया है | पर नही जैसे ही किसी ने मोडल कहकर दुनिया के सामने पेश किया तो सब उसी की सूट ( या धोती ) उतारने लगे | कृत्घन प्राणी ! "

हमने फिर मोडलों के राज्य में सरदार वलभ भाई पटेल की मूर्ति का दर्शन किया और लौट आये |

फिर भगवन मुझे मोडेलो के अन मॉडल राज्य प्रान्त बिहार में ले आये | अपना ही जगह था तो मेरे चेहरे पर लोकल होने का भाव आ गया | मन ही मन सोचा यहां तो भगवान भी तू- तडकम नही कर पाएंगे | मोबाइल घुमाऊंगा तो दस लोग आकर भगवान की खबर ले लेंगे | फिर भगवान् अगम ज्ञानी है ही वो क्या नही जानते |

भगवान थे भी समझदार | वो बिना कुछ कहे मुझे दिखाने के लिए स्ट्रेटेजिक जगहों पर ले गये |

एक जगह एक पुरानी खद्दर पहने हुए नेता भाषण दे रहे थे - " भाईओं एवं बहनों ! सरकार के पास समस्याओ को हल करने के लिए कोई मॉडल है क्या ? बिना मॉडल जग सून, अपना प्रान्त और आपका घर सूना ! भाइयो एवं बहनों ! मुझे पता है आप अपना घर चलाने के लिए कितने मॉडल बनाते है | आमदनी रहते हुए भी सबसे आप सस्ती सब्जी मिलने का समय पता करते है | बेटे बेटियां बिगड़ न जायें इसके लिए आप उन्हें शर्मा जी के बेटे का मॉडल अपनाने को बाध्य करते है | पार्टी ऑफिसों में घुस का जो पुराना मॉडल बन गया है उसे सची श्रधा से निभाते है | ...पर ये निकम्मी सरकार है | इन्हें किसी मॉडल अपनाने की बात करो तो मुह बिचकाते है | क्या ऐसे ही चलेगा अपना प्रान्त |"

फिर नेताजी कुरते के जेब में हाथ डालकर उसके फटा होने का प्रमाण देते हुए, हाथ उपर लाकर नाक का द्रव्य पोछते हुए बोले - " देखिये, ये है गरीबों की जेब | आधी आबादी का  जेब फटा हुआ है | इससे कमाई के पैसे, छुपाये गये कंडोम और बीवी के लिए लाये गये लिपस्टिक गिर जाते हैं  " | भावावेश में आते हुए फिर बोले  - " क्या सरकार के पास हमारी जेबों की सिलाई कर वाने के लिए कोई मॉडल है क्या ? "

इतना तर्कपूर्ण भाषण सुनकर मैं लगभग रो पड़ा | मैं व्यर्थ ही अपने प्रान्त के नेताओ को अनपढ़, स्वार्थी, बेवकूफ और न जाने क्या क्या मानता आ रहा था | भला हो ऐसे नेता का जिसने मेरी आँखें खोल दी  |

  भगवान् मुझे वहा से उठाकर एक गाँव की धर्मशाला पर ले गये | एक बैठक चल रही थी, जिसमे नेताकट पहने मुखिया जी, गाँवकट पहने सरपंच जी और दरिद्रकट पहने आमजन थे | मुखिया जी आने वाले चुनाव के बारे में चर्चा कर रहे थे | कौन कितना वोट ला सकता है और हरेक वोट का ' रेट ' कितना होगा | कुछ देर के वार्तलाप के बाद पता चले मुखिया जी स्वयं स्थानीय विधायक के वोट चुनवा आदमी थे और ये बैठक वोट चुनने के मॉडल के अंतर्गत हो रहा था |

ऐसे तो वोट चुनवा आदमी का मॉडल साफ़ होता है - शुद्ध लाभ | यानि क्रेडिट इज ग्रेटर डैन डेट | पर जितना साफ़ सुनने में लगता है मामला उतना ही पेचीदा है | मुखियाजी पहले ही कितने वोट चुन सकेंगे, इसका बढ़ा चढ़ाकर ब्यौरा दे आये होंगे | उसी हिसाब से रेट भी तय हुआ होगा | अब यहाँ उतना वोट चुनना थूक चाटने से मुश्किल सिद्ध हो रहा था | बैठक में मौजूद थोड़े बहुत शिक्षित आदमी अपने वोट के लिए कैश लेने के लिए तैयार थे | पर अनपढ़ों को सिर्फ कैश से संतोष न था | मांस, शराब और शबाब तो चाहिए ही था, कुछ लोग खुद को जमीनी स्तर पर वोट चुनवा घोषित कर ज्यादा खुराक पाने का दावा कर रहे थे | मुखिया जी को पता था ये सब साले नमकजलाल है | जैसे वो खुद विधायक साहेब को चिठा पकड़ा कर आये है ये लोग भी वही करना चाहते है | प्राइवेसी के नाम पर भारत में यही सुविधा है कि वोटो की गिनती गुप्त है | वरना जहाँ गुप्त रोगों के ग्रसित व्यक्ति की भी गुप्त बीमारी सबको पता चल जाती है , वहां हमेशा गुप्त काउंटिंग में गुप्ती ख़तम होने का डर बना रहता है |

जब हम वहां से जाने लगे तो भगवान् का चेहरा फिर से तमतमाया हुआ था | मुझे लगा भगवान् को मूड स्विंग होने की बीमारी है क्या | तन कर बोले - " आज समझ में आया तुम्हारी जाति  के जीवो ने क्यूँ  भगवान लोक के मॉडल की धज्जियाँ उड़ा रखी है | सबसे ज्यादा कठिन काम तो यमराज का हो गया है | सियार, लोमड़ी, गीध, कुत्ते तो बेचारे चुपचाप स्वर्ग या नरक में भेज दिए जाते है | पर तुम्हारी जाति ! यमराज को तरह तरह के प्रलोभन देते है | स्वर्ग में भेज दो, तुम्हारे जीवनभर के आमदनी जितना पैसा अभी ही दे देते हैं | जब उन्हें समझाया जाता है कि यहाँ अभी मुद्रा प्रणाली का विकास नही हुआ ही तो पॉवर पर आ जाते है | कोई बोलता है - यमराज जी आपको धरती का काम तो लगा ही रहता है न ! ऐसा है कि चाचा विधायक हैं हमारे | कपाड, पैर, हाथ सही सलामत रहे ऐसी इच्छा है तो ज्यादा सोचिये मत| सीधा स्वर्ग का दरवाजा खोलिए | तो कुछेक  भक्तगण ईमानदारी पर उतर आते है | यमराजिन के लिए रखा पान मुंह में लेकर मुस्कुराते हुए बोलते हैं - " देखिये महाराज, अब आपसे क्या छुपाना, पाप तो हमने खूब किया है | पर ऐसा है कि जीवन भर अमुक भगवान का ध्यान और पूजा भी खूब किये | भले ही परायी स्त्रियों को देखने के लिए ही सही रोज गंगा स्नान भी किये | अब क्रम में तो अमुक भगवान् आपसे ऊपर है हैं न ! खोलिए स्वर्ग का द्वार नही तो उनसे शिकायत कर देंगे हाँ ! " वो बस यमराज लोक तक नही रुकते | जिन पापियों को गलती से स्वर्ग में भेज दिया जाता है वो वहां की अप्सराओ व् नर्तकियों पर फब्तियां कसते है | लाइन तोड़कर पकवानों पर टूट पड़ते है | और तो और नहाने के लिए भी रोज झगड़ते है | फिर नरक लोक के क्या कहने | इधर से जो हॉस्टल में रहकर गये है वो तो कोने में नरक को भी स्वर्ग के उत्सव में बदल देते है | मांस, माल और वायफाई मिल ही जाता है | पर ये नेतागण ! | नरक में भी अपनी सुख सुविधा का इन्तेजाम करने के लिए पोलिटिकल प्रेशर डालते है | मना करने पर जिस लोकतंत्र पर पेशाब कर आये थे, लागू करने की बात करते हैं | वो आग की दरिया में मिनटों की सबसिडी मांगते है और जो बीमार लोगो के को सब्सिडी दी जाती है वो हडप जाते है | जिन नेताओं के चमचे मरकर नर्क पहुँच जाते है वो तो कब ही नरक को मिनी स्वर्ग बना चुके है | तहस नहस कर रखा है हमारे मॉडल का "

मुझे भगवान् लोक के इन रहस्यों का पता नही था | कुछ सवाल मन में उठे | पूछने के लिए मैंने भगवान् को खोजा पर वो हमारे यहाँ के मॉडल को छोड़कर अपना मॉडल सुधारने भगवान् लोक जा चुके थे | 



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