अनमोल खजाना
अनमोल खजाना
रवि निरंतर कुछ ना कुछ ढूँढता रहता और वह चीज जबतक नहीं मिलती उसे चैन नहीं आता। आजतक बहुत सी कहानियाँ उसे प्राप्त हुई थी, जिसपर वह शोधकार्य पूरा कर सकें किंतु वह अब भी बेचैन है। उसे जिस कहानी की दरकार थी वह अभी तक उससे दूर थी। एक शिक्षक तथा साहित्यकार होने के कारण वह कहानियों के पीछे इतना पागल था कि उसे हर तरफ कहानी ही दिखती कोई अन्य चीज तो नजदीक होकर भी उससे दूर थी।
आजकल वह एक श्रेष्ठ रचनाकार की ऐसी रचना को हासिल करना चाहता था जो अभी तक लोगों से दूर थी। नये - पुराने सब साप्ताहिक, पत्रिका तथा लेख वगैरह सब स्त्रोतों को खंगाला किन्तु उसके काम की कोई चीज नहीं मिली। अपना काम न करने के कारण वह काफी उदास था, उसी वक्त उसके दोस्त के द्वारा एक कहानी मिली जो कि एक साहित्यिक वेबसाईट पर थी। उसने वह खोली तो वह देखते ही दंग था, अपने ऑंखों पर विश्वास नहीं हुआ लेकिन उसने जो देखा वह एक सत्य था। देखते - देखते उसको अपने काम की रचना उसपर प्राप्त हो गई, उसने अपने दोस्त को तुरंत फोन कर धन्यवाद किया।
रवि जो अबतक उदासी लिए बैठा था, उसका चेहरा अचानक खिल उठा। उसे आज ना सिर्फ वो रचना मिली बल्कि अन्य साहित्य भंडार भी मिल गया जिससे वह अभी अपरिचित रहा। आजतक किस्से कहानियों में ही सुना था पर आज असल जिंदगी में भी खजाना होता है पता चला। ये खजाना रवि के लिए बहुत मायने था।
