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Twinckle Adwani

Tragedy

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Twinckle Adwani

Tragedy

अंधेरों में उजाले मिटाए गए

अंधेरों में उजाले मिटाए गए

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एक पॉश एरिया में घर तो लिया मगर उलझन बढ़ गई क्योंकि गाड़ी व कुत्तों की आवाज मुझे सोने नहीं दे रही। घर एक अस्पताल के पास लिया है जहां रात होते ही भीड़ बढ़ जाती है। आसपास के कुत्ते को आवाज करते हैं मेरी खिड़की से अस्पताल में आने जाने वाले लोग साफ दिखाई देते हैं।अस्पताल में कांच लगा है। लंबी लाइनें भी दिखती है। महिलाओं का आना जाना लगा रहता है।

 अजीब सी बेचैनी होती है यहां, आसपास के लोगों से जब भी बात होती है वो डॉक्टर की बहुत तारीफ करती कहते बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं।

 मैं खिड़की के पास बैठकर निहारती वही बैठकर काम करती कुत्तों की आवाज क्यों इतना परेशान करती है। सोचा पहले कहीं जा कर देखूँ, रात को टॉर्च लेकर। मैं हिम्मत करके बाहर गई मगर भीड़ की वजह से वापस आ गई।

एक रिपोर्टर होने के नाते मेरी आशंका बढ़ती जाती है। न जाने क्या मन में खटकता था। मैंने कई बार हिम्मत करके उस कचरे के ढेर में जाना चाहा और एक दिन मैं वहां गई कुत्ते को पत्थर मार कर भगाया उन काली पनियों को खोलकर देखा तो दिल..

 कुत्ते नोच नोच कर बच्चे के मांस खा रहे थे उफ्.

कई रातें मुझे नींद नहीं आई अंधेरों में उजाले मिटाए जाते थे मैंने पुलिस प्रशासन की मदद से गुनाहगारों को सजा दिलाई लेकिन हजार प्रश्न मेरे मन में,  मेरे मन में आज भी है क्यों क्यों एक मां 

क्यों रे समाज और क्यों लड़कियां होना पर।


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