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Saroj Garg

Tragedy

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Saroj Garg

Tragedy

अकेलापन

अकेलापन

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अकेले है चले आओ कहाँ हो,

कहाँ आवाज़ दे तुमको कहाँ हो ।


आजकल के माँ -बाप के ये गीत पूर्णरूप से चरितार्थ है ।

माँ-बाप अपना सारा जीवन अपने बच्चों की खुशी के लिए व्यतीत कर देते हैं ।न दिन देखते हैं न ही रात ।अपनी हर व्यथा को छिपा कर बच्चों की खुशी में अपनी खुशी ढूंढ लेते हैं। कभी बच्चों को किसी चीज की कमी नहीं होने देते हैं। अपना हर सुख त्याग कर अपने बच्चों पर समर्पित कर देते है। ताप हो ,दुख हो, दर्द हो कुछ नहीं दर्शाते हैं, बस अपने बच्चों को सारी खुशियाँ मिल जाये, यही आजकल के माँ- बाप चाहते हैं, जिसका बच्चे कभी-कभी नाजायज़ फायदा उठाते हैं। 

हमारे समय में एक बार भी अनुचित मांग पूरा नहीं करते थे ।एक झिड़की दी और हम शांत हो जाते थे , कभी जिद नहीं करते थे। 

 उसका नुकसान कभी माँ बाप को नहीं हुआ। संयुक्त परिवार में रहना, बड़ों का आदर करना ही हम सब बच्चों का फर्ज था ।कभी किसी को कोई तकलीफ होती तो सारा परिवार उसकी तीमारदारी में जुट जाता । कभी अकेला पन महसूस ही नहीं हुआ। कभी कोई अकेला रहा ही नहीं। दादा -दादी, चाचा-चाची, ताई ताऊजी बुआ सब साथ रहते थे बड़ों का कहना सब मानते थे कोई गिला शिकवा नहीं था ।

  आज का समय परिभाषित किया जाए तो अकेला पन ही वृद्ध माता-पिता को हीन भावना से ग्रसित कर रहा है। बच्चे पढ़ लिखकर सुदूर देशों में जा बसते हैं, और अपने पंखों को एक नई उड़ान देते हैं। उसमें वृद्ध माँ बाप कहीं नज़र नहीं आते हैं। किस तरह से अपना जीवन अकेले गुजारने पर मजबूर कर दिये जाते हैं। अपने हर दुख को अकेले ही झेलते हैं। अपना कोई पूछने वाला नहीं होता है। 

एकाकीपन एक नासूर बन गया है,

और ये झेलने के लिए मजबूर हैं। फोन पर बात करने के लिए बच्चों के पास समय नहीं होता है। पोता -पोती की आवाज़ सुनने के लिए तरस जाते हैं 

बच्चों को दादा-दादी, बुआ को जानते तक नहीं। 

  इसी वजह से आजकल वृद्धाश्रम का धंधा खूब पनप रहा है। बच्चों के पास वृद्धाश्रम अपने माँ बाप के लिए उपचार है। माँ-बाप को बच्चे अपने साथ नहीं रखना चाहते। इसीलिए माता -पिता अकेले ही अपना बुढ़ापा जैसे तैसे काट रहे हैं। उनकी आँखें में हमेशा आँसुओं से नम रहती है अपने बच्चों को देखने के लिए तरसती हैं। अकेलापन क्या होता है ये आजकल के मा बाप से पूछो तो पता चलेगा कि अकेलेपनका दर्द कैसा है, पूछते ही आँसुओं की झड़ी लग जायेगी ।

    इसलिए अपने माँ बाप को अपने साथ रखो ,उनकी सेवा स्वयं अपने हाथों से करो ,उनके अनुभव अपने बच्चों के साथ मिलकर बांटों , कुछ समय उनके साथ बिताओ ,तो उनकी अंतरात्मा से जो दुआ निकलेगी तुम्हारे और तुम्हारे परिवार के लिए वो करोड़ों की दौलत से भी ज्यादा होगी। जो तुम्हें जीवन भर सुख और आत्म शांति देगी ।

     


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