ऐसी कहानी भी
ऐसी कहानी भी
ज़माने को जरूरत कहाँ मेरी '
अल्फाज़ो ने बस ज़िंदा बना रखा है !
वक़्त का फ़ेर है।
हर कोई गैर है !
झूठे इंसान, क्या जाने सच कहना !
पहले सच बोलो, फ़िर साबित भी करना !
प्रेम सरल है पुष्प की भांति !
मग़र कठिन है धर्म और जाति !
अपनी ही खुशियों का अपने ही हाथों गला घोंटा मैंने
अपनी हर खुशी हर ख्वाहिश
हर ख्वाबों को किसी के हाथों में जो दिया मैंने !

