अहंकार
अहंकार
पुष्पा अहंकार जब भी बोलता है, सिर चढ़कर ही बोलता है।
पुष्पा ने पूछा आज ऐसा क्या हो गया। जो सुबह-सुबह आपकी जुबान इतनी कड़वी हो रही है।
हमने कहा वैसे हमारा व्यवहारिक ज्ञान खुशमिजाज रहना है।
परंतु कुछ बदतमीज, बिगड़ैल, अव्यावहारिक लोग हमारी जुबान को करेले से भी ज्यादा कड़वा वह भी नीम चढ़ा बना देते है।
अमित ने कहा ऐसी क्या बात हो गई भाई साहब।
हमने कहा हमारा भारत देश बड़ी अजीबो गरीब मानसिकता लिए हुए बैठा है।
यहां पर लोगों की अव्यावहारिक मानसिकता है। दूसरे के फटे में टांग अड़ाना।
यह भारतीय मानसिकता ही कहा जाएगा। जो उड़ता हुआ तीर पकड़ लेते है।
यह सिर्फ भारतीय ही कर सकते हैं।
पुष्पा ने कहा दिमाग को थोड़ा ठंडा कर लीजिए। दिमाग को जरा शांत कर लीजिए।
जो भी आप के कार्यालय में आपके साथ घटा है।
उसे शांत मन से बताइए, अमित ने भी कहा शांत मन से आप हमें अपनी बात बेहतर ढंग से समझा पाएंगे। भाभी जी सही कह रही हैं। आप अपने दिमाग को ठंडा रखिए बताइए कौन सी बात आपको अत्यधिक परेशान कर रही है।
हमने कहा बात बहुत छोटी सी है हालांकि इससे परेशानी तो नहीं हो रही।
परंतु इतना अवश्य समझ आ रहा है। किसी को थोड़ा भी अधिक ज्ञान प्राप्त हो जाए। तो वह ऊंची ऊंची गुलाटिया मारने लगता है। जैसे कहते हैं अंधों में काना राजा जैसे कहते हैं हल्दी की गाँठ हाथ लगी तो चूहा पंसारी बन बैठा।
पुष्पा ने कहा आखिर बात क्या हुई है। हमने कहा बात इतनी सी थी। कंपनी में एक नया नाम का लड़का नितिश मिश्रा काम करने आया है।
उसे हमने झाड़ लगा दी। उस झाड़ को सुनकर नीतीश मिश्रा चुप हो गया।
परंतु मोहम्मद जावेद गुस्से से बिखर पड़ा।
बोला मैं यह काम करता हूं मैं वह काम करता हूं मैं पिक लिस्ट भी लगाता हूं मैं माल भी निकालता हूं मैं माल भी बनाता हूं मैं सप्लाई भी कर लेता हूं। आप जो काम मुझे बोलते हो। उसे भी मैं कर लेता हूं। मैं गलत बर्दाश्त नहीं करता।
हमने कहा यदि हम यहां काम करने आए हैं। तो काम तो हमें करना ही होगा। वह काम किसी भी प्रकार का हो सकता है। हमें काम करना ही होगा।
कार्यालय में काम किए बिना गति नहीं है। काम ही पूजा है काम ही कर्म है। कर्म भूमि में कर्म करने ही होंगे। इससे कोई भी अछूता नहीं रहा। आप भी नहीं रह सकते। आप काम करते हो अच्छी बात है।
तभी उसने स्थिति को भांपते हुए अपने सुर बदले। मैं कह रहा हूँ सर जो भी काम आपने सिखाया है। उसकी मैं सबसे भूरी भूरी प्रशंसा करता हूं। जो ऑफिस में बदलाव आए हैं। वह भी आपकी मेहनत के फल स्वरूप आए हैं। आज भी जितने नियम कायदे शर्तें तेजी से बदल रहे हैं। वह आपकी मेहनत के फल स्वरूप ही बदल रहे है। परंतु आप यह बताएं मेरे काम में कहां कमी है।
हमने कहा मोहम्मद जावेद काम में कोई कमी ना हो। यह तो बहुत अच्छी बात है। परंतु काम करने पर अहंकार बढ़ जाए। तब व्यक्ति में मैं मैं की बू आने लगती है। जब व्यक्ति में मैं-मैं की बू आती है। तब वह पूरे समूह में या पूरी टीम में अपने आप को सर्वश्रेष्ठ घोषित करने में लग जाता है। हमने कई बार इस बात पर बहुत ध्यान दिया है। जब भी आपसे कोई बात होती है। किसी से बात होती है। तो आप बार-बार विज्ञापन की तरह हमारे दिमाग में यह बताने का प्रयास करते हो। कंपनी में मुझसे ज्यादा सफल व्यक्ति कोई नहीं है।
आप कई बार मुझसे जिगर कर चुके हो। मेरी तरक्की नहीं हो रही।
जबकि अमित आप मानोगे नहीं हमने मोहम्मद जावेद से कहा पद तरक्की ही तरक्की नहीं होती।
काम को व्यवस्थित ढंग से करना भी तरक्की माना जाता है। काम को पूजा समझने को भी तरक्की माना जाता है। काम को समय अनुसार करने को भी तरक्की माना जाता है। अपने बॉस की सलाह को मानकर कार्य करने को भी तरक्की माना जाता है। अपने बॉस की सीख को अपने व्यवहार में उतारने को भी तरक्की माना जाता है।
खुद की तरक्की में भी इतना वक्त लगा दो की बेकार की बातों में ध्यान इधर-उधर ना भटके।
जितना बेहतर बन सकते हो उतना बेहतर बनो। उसे भी तरक्की कहा जाता है।
अपने ऊपर समय दो क्योंकि आज के समय में रिश्ते पैसों से चला करते हैं।
हमने कहा आप काम करते हो इसमें कोई शक नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं है।
परंतु आपके काम में तरक्की सिर्फ इसलिए नहीं हो पा रही। क्योंकि आप जब भी अपने काम को बताते हो। उसमें अहंकार बोलता है।
मोहम्मद जावेद यह बात सदैव याद रखना झूठी शान के परिंदे ही ज्यादा फड़फड़ाते हैं।
तरक्की के बाज़ की उड़ान में आवाज नहीं होती।
मोहम्मद जावेद यह बात भी याद रखना दीपक को अहंकार होता है। वह सब का मार्गदर्शन करता है। जबकि घी और बाती से प्रकाश हो रहा होता है।
मोहम्मद जावेद अहंकार में व्यक्ति जो करता है। अहंकार में व्यक्ति जो बोलता है। उसे भी आप ध्यान रख ले।
मोहम्मद जावेद ने कहा बताओ आप ही बताओ।
हमने कहा हम क्या बताएंगे आप तो खुद ही ज्ञानी हो। परंतु आपने पूछा है तो बता देते हैं।
थोथा चना बाजे घना।
किसी कार्य को लगातार करते रहने से अभ्यास हो जाता है। यह बात सोलह आने सच है।
परंतु उस अभ्यास को करते-करते अभ्यस्त होने के बाद अहंकार उसे अपनी द्वारा नियंत्रित कर लेता है।
वही हाल आपके व्यवहार में भी लागू होता है।
आपको यह भी बता दे मोहम्मद जावेद अहंकार और गुस्सा जो आप करते हो।
वह आपके मित्र नहीं सबसे बड़े दुश्मन हैं।
जिस दिन आप अहंकार रहित जीवन जीना शुरु कर दोगे। उस दिन से आपकी तरक्की स्वयं से हो जाएगी।
उस दिन से आपको तरक्की के लिए हमें बोलना नहीं पड़ेगा।
क्योंकि सब कुछ जीता जा सकता है। अच्छे व्यवहार से अच्छे आचरण से और जीता हुआ भी हारा जा सकता है अहंकार से।
इसीलिए अमित सबसे कहता हूं अहंकार से दूर रहे। अहंकार हमारा सबसे बड़ा शत्रु है, मित्र नहीं।
इसे पहचाने इससे अपने जीवन से दूरी बना ले।
यही तरक्की के द्वार खोलता है।
इतिश्री
