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Shailaja Bhattad

Inspirational Children

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Shailaja Bhattad

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अच्छी वज़ह

अच्छी वज़ह

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"गीता तू कितनी सकारात्मक हो गई है। इतने सालों बाद फिर से तुझसे मिलकर बहुत अच्छा लगा। तेरा व्यवहार, तेरी सोच में परिपक्वता...! वाह तू तो मुझे प्रभावित कर गई, लेकिन तुझमें यह सुखद बदलाव आया कैसे?"


 "तेरी वजह से ही रागिनी।"


"मेरी वजह से?"


 "हाँ! भूल गई? स्कूल के दिनों में जब भी हममें से कोई भी नकारात्मक बात करता था, तब तू हमारा साथ देने की बजाय सिर्फ यह कहती थी इससे सिर्फ नकारात्मकता बढ़ती है। सिर्फ़ अच्छी सोच का परिणाम ही अच्छा मिलता है। एक बात और याद है जब हमारी कक्षा की लड़कियाँ बगल वाली कक्षा की लड़कियों से लड़ती थी, तब तुझे भी लीडर की तरह अपने बचाव के लिए सामने लाने की कोशिश करती थी , लेकिन तू सिर्फ एक झलक देखती और अपना मुँह किताबों की ओर मोड़ लेती थी जैसे कुछ सुना ही न हो। फिर लड़ाई अपने आप बंद हो जाती। तेरी वज़ह से कक्षा युद्ध का अखाड़ा बनते-बनते रह जाती। कभी किसी शिक्षक या शिक्षिका के हस्तक्षेप की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। कक्षा का माहौल कितना सकारात्मक हो गया था, कि बगल की कक्षा की लड़कियाँ भी लड़ना भूलकर गणित के प्रश्नों का हल तुझसे पूछने आती थी। अच्छा एक बात बता, तुझमें इतनी परिपक्वता विद्यालय के समय से ही कैसे है ?"

 "मुझे उस समय यह सब तो पता नहीं था। बस कुछ भी सही नहीं लगने पर अंदर से एक ही आवाज आती थी 'ध्यान मत दे'।"


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