अब तो जाओगी ना घर...?
अब तो जाओगी ना घर...?
" क्या बात है प्रिया ! तुम वरुण से नाराज हो क्या तुम उसका फोन क्यों नहीं ले रही हो ? "
अवनि ने प्रिया को पूछा तो प्रिया ने गुस्से से कहा कि ...
" मुझे उससे कोई बात ही नहीं करनी है .... बस ... ! वरुण ने जो मेरे साथ किया .... जो किया ... उसके बाद मुझे उससे बात करने का बिलकुल भी मन नहीं है ! "
अवनि ने आश्चर्य से पूछा ....
" अरे ... ? ऐसा क्या कर दिया वरुण ने ? जो तुम उससे इतनी नाराज हो तुम दोनों तो एक दूसरे से इतना प्यार करते थे कि .... कॉलेज के समय से ही हम लोग तुम दोनों के प्यार के किस्से सुनते और सुनाते थे । तुम लव बर्ड्स को ऐसा क्या हो गया कि ... तुम एकदम नाराज़ हो गई हो ? "
अवनि के बार बार पूछने पर प्रिया ने जो सुनाया वह एकदम विश्वास करने के लायक नहीं था ।
प्रिया ने बताया कि ...
" वरुण का अपनी ऑफिस की कुलीग मीता से अफेयर चल रहा है । और अब वह उसके बच्चे की मां बनने वाली है ।
मैं समझ नहीं पा रही हूँ कि ...वरुण ने मेरे साथ ऐसा विश्वासघात क्यों किया ?
" तू श्योर तो है ना प्रिया कि वरुण काफी सीरियस है । वह तेरे से मजाक तो नहीं कर रहा ? "
" क्यों तुझे ऐसा क्यों शक हो रहा है? "
क्योंकि ... परसों फर्स्ट अप्रैल था । और उसने हम सबसे कहा था कि ...
" मैं प्रिया को बुद्धू जरूर बनाऊंगा । देखना ... वह विश्वास नहीं करेगी । क्योंकि ... प्रिया को मुझ पर और मेरे प्यार पर बहुत विश्वास है !"
और ... इतनी आसानी से बुद्धू बन गई । क्या तुझे वरुण पऱ जरा पर भरोसा नहीं है ? "
अवनि के बोलते ही प्रिया को याद आ गया.... कि
सच में .... दो दिन पहले तो पहली अप्रैल थी । और हो सकता है वरुण ने उसे बुद्धू बनाया हो।
ज़ब अवनि ने प्यार से पूछा...
"अब तो वरुण के पास जाओगी ना...?
अपने घर जाओगी ना...?"
अब उसका गुस्सा खत्म हो गया और वह वरुण के पास जाने के लिए तैयार हो गई।
ज़ब वह वरुण से मिली तब उसने कहा,
" मुझे विश्वास था कि तुम जरुर आओगी तुम जान जाओगे कि मैं मैंने तुमसे मजाक किया था कि मैं तुम्हें बेहद प्यार करता हूँ। प्यार ऐसा ही होता है । कुछ दिनों की गलतफहमी हो सकती है , लेकिन प्यार कभी खत्म नहीं हो सकता!"
और... प्रिया यह सोच रही थी कि अगर उसे अवनि ने नहीं समझाया होता तो वह ना जाने कब तक़ वरुण को गलत ही समझती रहती।
दूर आसमान में चांद चमक रहा था और उसकी चांदनी से आज प्रिया का घर आंगन भी दमक रहा था।
आखिर...
एक बार फिर प्यार और विश्वास की जीत जो हुई थी।

