STORYMIRROR

Archana Saxena

Tragedy Inspirational

4  

Archana Saxena

Tragedy Inspirational

आज को सँवार लो

आज को सँवार लो

2 mins
372


अभी कल ही की बात लगती है जब रचना विवाहोपरान्त इस घर में आई थी। आते ही घर की जिम्मेदारियों में उलझ कर रह गई। पूरे घर को सम्हालने के साथ शिक्षिका की नौकरी भी करती थी। इतने सबके बाद भी उसे परायेपन का अहसास सदा ही कराया जाता। काम करने के लिये घर उसका था, कोई निर्णय लेने का हक कभी नहीं मिला। आज अठ्ठाइस बरस बाद भी अपने ही पुत्र के विवाह से सम्बंधित किसी निर्णय पर ससुरजी ने लगभग दहाड़ते हुये कहा "यह तुम्हारा घर नहीं है। यहाँ मेरे हिसाब से सब काम होंगे" भौंचक्की सी देखती रह गई वह। पति हमेशा की भाँति सिर झुका कर शान्त खड़े रहे। बेटे ने विरोध किया तो उसे दादी ने संस्कारों की दुहाई देकर चुप करा दिया।जब अपमान और दुख पर नियंत्रण नहीं रहा तो कमरे में जाकर फूट फूट कर रोई रचना।

जब शांत हुयी तो एक निर्णय लिया 'बस बहुत सह लिया। अपनी बहू के साथ ये सब नहीं होने दूँगी। उसका कल सँवारने के लिए मुझे अपना आज सँवारना होगा। न अन्याय करुँगी न सहूँगी।'सूखे हुए आँसू पोंछ कर चेहरा धोया। पति व पुत्र को को बुला कर सास ससुर के कमरे में गयी और बोली "आप लोगों के लिये सर्वेन्ट का इन्तजाम हो जायेगा। पर मैं बेटे की शादी के बाद किराए के घर में शिफ्ट हो रही हूँ क्योंकि यह घर अब तक मेरा न हो सका। टीचर हूँ, इतना तो अपने लिये कर ही पाऊँगी। और हाँ जो घर आज तक मेरा न हुआ वह मेरी नयी बहू का कैसे हो पायेगा। मेरे बेटा बहू चाहे तो मेरे साथ रह सकते हैं, न चाहें तो अलग आशियाना बसा लें। पर अब और अपमान न मैं सहूँगी न बहू का होने दूँगी।"

पति की आँखों में शर्मिन्दगी थी। माँ पिताजी के सम्मान की वजह से पत्नी का जिन्दगी भर अपमान होने दिया। बेटे ने जब भी बोलना चाहा उसे भी चुप रहने की सलाह दी। आज इसीलिये पानी सिर से ऊपर निकल गया।

बेटे ने माँ को गले लगाकर कहा "किसी के आदरभाव को उसकी कमजोरी समझना सबसे बड़ी भूल है। सचमुच माँ यह इस घर के लोगों का दुर्भाग्य है जो उनकी ऐसी सोच है। कुछ दिन किराए पर रह लेंगे फिर आपके नाम से घर खरीद कर दूँगा माँ ! जहाँ कदम कदम पर मेरी माँ का अपमान हो वहाँ मुझे भी नहीं रहना।"

अहम् के वशीभूत ससुर जी ने एक शब्द न कहा। परन्तु सास ने सारे हथकंडे अपना कर रोकने का बहुत प्रयास किया। इस बार रचना ने एक नहीं सुनी। कल तक जो हुआ वह हुआ परन्तु एक बेहतर कल के लिये उसने दृढ़ संकल्प के साथ आज सँवारने का प्रयत्न प्रारंभ कर दिया।


   


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Tragedy