आईने का रहस्य भाग 29
आईने का रहस्य भाग 29
सभी पिशाच पर फिर से अभिमंत्रित अक्षत फेकते हैं तो वह एकदम से घबरा जाता है उसकी चीखे निकलने लगती है, उसे लगता है उसे ये लोग भ्ष्म करके ही छोड़ेंगे, वह हाथ जोड़कर कहता है " मुझे क्षमा करें में आप सबका सेवक बनने को तैयार हूं, आप सब जैसा कहेंगे वैसा करूंगा, में आप सभी का गुलाम बन कर रहूंगा, " !!
जय सबको रुकने का इशारा करता है, और उस से कहता है " हम तुझे गुलाम नही बनाना चाहते हैं बस मणि दिलाने में हमारा पुर्ण सहयोग कर, मणि मिलने के पश्चात तुम हमारे साथ रहना चाहो तो रहो अन्यथा मुक्त हो कर अपना काम करो, हमारे साथ रहोगे तो तुम्हे तुम्हार उचित भोग मिलता रहेगा, "!!
वह जय के चरणों में समर्पित हो कर सब मानता है, जय कहता है, " अब हमे यह बताओ कि हम अब क्या करें जहां मणि है, वहा तक पहुंचने में मार्गदर्शन करो, "!! वह कहता है," वहां जाना आसान नहीं है, यहां से थोड़ी दूर जाने पर एक ब्रह्म पिशाच का स्थान पड़ेगा, उसे भोग दिए बिना आगे नहीं बढ़ सकते, और उसका भोग तो छप्पन भोग है, वह कहां से आएगा ""!!,
भीमा कहता है " तुम कब काम आओगे, ये सारी व्यवस्था तुम्हे ही करनी होगी, "!! वह हामी भरता है, और कहता है," यह तो भोग की बात हो गई, पर उसे मनाएंगे कैसे, वह इतनी आसानी से नहीं मानेंगे,और बिना उनकी इच्छा के हम आगे नहीं बढ़ सकते हैं, "!!
विशाल पूछता है, " उन्हे मनाने का कोई तो मार्ग होगा, ,!! पिशाच कहता है," मार्ग तो है, परंतु आसान नहीं है, उन्हे सभी लोग भोग देने के पश्चात निवेदन करना, अगर वह प्रसन्न हो गए तो आसान हो जायेगा, तुम में से कितने ब्राह्मण है।
सब एक दूसरे को देखते हैं, उसमे से आठ लोग ब्राह्मण थे, पिशाच कहता है, " ब्रह्म पिशाच ब्राह्मणों का निवेदन नही ठुकराएंगे, उन्हे जितना आदर सम्मान देंगे वह खुश हो जायेंगे, "!!
ब्राह्मण तांत्रिक कहते हैं, " हम अपनी तरफ से पूरा प्रयास करेंगे, बाकी सभी लोग वहां पहुंचते ही उन्हे प्रणाम कर लेना है, "!! जय कहते हैं " चलो जल्दी अब समय बरबाद ना किया जाए,।
पिशाच कहता है, " मैं आगे जाकर भोग का इंतजाम करता हूं, आप सब आइए"!!! वह वहां से गायब होता है, सभी आगे बढ़ते हैं,
दूसरी तरफ मोहन बहुत परेशान हो गए थे, भीमा कि पत्नी ने एक महिला संस्था में कंप्लेंट कर दिया था और वह कई महिलाएं आकर कोठी पर हंगामा कर दिया है और उसके साथ धरने पर बैठ गए थे, उसका फायदा राजनीतिक पार्टियां भी उठाने लगती हैं, वह इसे राजनीतिक रंग देने लगती है, मोहन को पूजा छोड़कर उनके चक्कर में परेशान होना पड़ता है, उन्हे वहां के स्थानीय मंत्री ने बुलवा लिया था और उनसे पुलिस अधिकारी और महिला आयोग के सामने सवाल जवाब शुरू कर देते हैं, मोहन सबको जवाब देता है, महिलाएं पूरे हवेली का सर्च वारंट चाहती थी, पुलिस अधिकारी ने कहा, कि" वह सब कई बार सर्च कर चुके हैं इनके घर में कोई सुराग नहीं मिलता है, अब जबरन सर्च करने का कोई मतलब नही है, "!!
मोहन एक सभ्य नागरिक हैं और हमारे शहर के सम्मानित वायक्ति हैं, इनका कोई अपराधिक रिकॉर्ड भी नही है, और कोई किसी के घर आकर कहीं गायब हो जाए तो उसमें उसकी क्या गलती है, "!!
महिला आयोग वाले पुलिस को मोहन के साथ मिली भगत का आरोप लगाती हैं तो मंत्री भी भड़क उठते हैं, वह उन महिलाओं से कहते हैं," देखिए आप लोग महिला आयोग के नाम पर किसी सभ्य और सम्मानित नागरिक को परेशान करने का हक़ नहीं पा लिया है,जब वह हर तरह से सहयोग कर रहे हैं तो उन्हे गिरफ्तार करके कई बार सर्च करके क्या मिलेगा, और हमारे पास या तुम्हारे पास कोई सबूत भी नही है, तो किस तरह उन्हे मुजरिम कहा जाए, बाकी आपको कुछ करना है तो जाइए कोर्ट के दरवाजे खुले हैं, **!!!
दरअसल महिला आयोग की महिलाएं तो कुछ वसूल करने के चक्कर में थी, पर यहां पासा पलट गया था, वह सब मन मसोस कर रह जाती हैं, पर उनके तेवर से लग रहा था कि भले अभी मौका हाथ से गया पर वह छोड़ेंगी नही, वह सब भीमा की पत्नी के साथ जाती है, !!?
मोहन को चिंता तो पूजा की थी, उसे इस बात का डर था की कहीं पूजा में कोई व्यवधान ना आ जाए, !! मंत्री उन्हे ध्यान रखने के लिए कहते हैं और भीमा की पत्नी को कुछ पैसे देने को कहते हैं जो मोहन उसी समय उनके सामने ही दे देते हैं, *"!!
मंत्री भीमा के पत्नी से कह देते हैं कि इन्हें बिना मतलब परेशान मत करो,"!! वह आंखो में आंसू लिए जाति है, उस बेचारी की तो गलती थी नही, यह तो मोहन भी जनता है, और सही बात तो यही है की उसका पति उसके घर से ही गायब हो गया था,, ,,!
आगे की कहानी अगले भाग में पढ़िए,""!!

