आधी रात का इन्साफ
आधी रात का इन्साफ
प्रीत विहार की वो पार्क वाली सुनसान गली, जहाँ रात छोड़ो दिन में भी सन्नाटा होता है। एक ऐसी गली जहाँ कोई नहीं जाता, जहाँ सिर्फ हवाएं चलती हैं और अजीब आवाजें आती हैं। वहाँ एक पेड़ के नीचे एक कार होती है और पेड़ के थोड़ी ही आगे एक सुनसान बंगला, जिसमें कोई नहीं रहता। सिर्फ एक लड़की है और वो लड़की कौन है, यह उसको खुद को नहीं पता!
हा-हा-हा-हा-हा.........!
रात का समय था, बारिश हो रही थी, बिजली कड़क रही थी और बादल गरज रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे कोई यह सब करवा रहा हो। "वरन" ऑफिस में अकेला था, बाकी सभी बारिश से पहले घर चले गए थे। वरन ने काम देर से पूरा किया और तभी बारिश शुरू हो गई।
अचानक ऑफिस की लाइट चली गई, चारों तरफ अंधेरा छा गया। वरन ने मोबाइल की लाइट जलाई। तभी खिड़की अचानक अपने-आप खुली, जोर की हवा आई और मोबाइल वरन के हाथ से गिरकर टूट गया।
कुछ ही देर में सब कुछ बदल गया। ऑफिस अब एक डरावनी हवेली में बदल चुका था। वरन डरकर चिल्लाया— "कोई है? गार्ड? कोई सुन रहा है? गार्ड! लेकिन किसी ने कोई आवाज नहीं दी, क्योंकि बहुत देर हो चुकी थी।सभी घर जा चुके थे।
वरन डरकर एक कोने में बैठा और कहा— लगता है सुबह तक ऑफिस में ही रहना पड़ेगा।" वरन सो जाता है। आधे घंटे बीत गए थे कि तभी बारिश रुक जाती है। तभी चूड़ियों के खन-खन और पायल की आवाज आती है। छन-छन की आवाज ने वरन की नींद खोल दी।
वरन की आँखें खुलती हैं। "कौन है?" उसे आवाज कहीं से आ रही होती है। उसे लगता है मेरा सपना था। फिर वह उठकर देखता है। "यह क्या? बारिश तो रुक गई। चलो, अब घर चलता हूँ।"
वरन दरवाजे पर जाता है और दरवाजा खोलता है, लेकिन दरवाजा नहीं खुलता। वरन जोर लगाता है लेकिन कोई फायदा नहीं। दरवाजा बाहर से बंद था। "लगता है दरवाजा बाहर से बंद है। किसी ने गलती से बंद कर दिया होगा।" वरन ऑफिस में ही सोने की कोशिश करता है, तभी—
चूड़ियों की खन-खन और पायल की छन-छन के साथ आवाज आई— "किसी ने नहीं, मैंने किया।"
वरन कहता है— "कौन है? कौन मजाक कर रहा है? बाहर आओ!
" आवाज आती है— "हाँ, मैं हूं तुम्हारे लिए।"
वरन कहता है— "देखो, मजाक मत करो, जो भी हो बाहर आओ।" तभी आवाज तेज होती रहती है और अचानक एक लड़की सामने आती है।
वरन कहता — "तुम ?
लड़की कहती है— "हाँ, मैं! याद करो। मुझे अपने ऑफिस के पास प्रीत विहार के पार्क वाली गली में अपने चार दोस्तों के साथ मुझे अकेले देखकर मेरे साथ कैसे गलत काम किया। मैं तड़पती रही, रोती रही रही, मना करती रही, पर तुमने मुझे नहीं छोड़ा और बाद में मार दिया।"
अब में आत्मा बन गई हूँ और अब तुमसे अपना बदला लेने आई हूँ। सबका मार दिया, अब बस तुम बचे हो।"
"नहीं, मुझे जाने दो प्लीज!" वरन चिल्लाता रहा, लेकिन उसने एक न सुनी और कमरे में ले गई। कमरा बंद हुआ और आत्मा ने वरन को मार डाला।
यह बात अगले दिन मीडिया में फैल गई। सबने सोचा किसी ने मर्डर किया है, लेकिन किसी को नहीं पता कि यह काम उस लड़की की आत्मा का है।
लड़की के बदला पूरा हुआ।
कल उस लड़के और उसके गैंग का समय था, उन्होंने एक लड़की के साथ बुरा किया और उसे मारा। अब उस लड़की की आत्मा का समय था।
जैसा किया वैसा पाया। उन्होंने लड़की की नहीं सुनी, आज लड़की ने उनकी नहीं सुनी। उनके साथ वैसा ही हुआ जैसे उन्होंने किया था। जहां जाने के वे लायक थे। नर्क का दुआर।
लेखक — न्यूसन साहू

