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Kahaniyon Ki Duniyaa

Classics

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​(( सीता की पुकार और राम का साहस ))

​(( सीता की पुकार और राम का साहस ))

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गर्मी का मौसम था, सभी काम पर व्यस्त थे। राम, बलराम, पार्थ और अर्जुन चारों आम के पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे।

तभी हनुमान जी आते हैं और सभी हनुमान जी को आता देखकर कहते हैं— "आओ, आओ हनुमान! तुम्हारा ही इंतजार था।"

हनुमान जी कहते हैं— "अरे! यह क्या? तुम सभी पेड़ के नीचे बैठकर आराम कर रहे हो, यह तो सही नहीं है।"

सभी एक साथ कहते हैं— "गर्मी के मौसम में आराम नहीं तो क्या करें?"

हनुमान जी कहते हैं— "अरे! पेड़ पर इतने सारे आम हैं, कितने मीठे, कितने रसीले! इसे तोड़कर खाओ।"

​अर्जुन ने कहा— "आम! अरे हाँ, वो तो मुझे भी बहुत पसंद हैं।"
फिर सभी आम तोड़कर खाते हैं। तभी आवाज़ आती है— "बचाओ! बचाओ! आग... आग... कोई है?"

राम कहते हैं— "अरे! यह तो सीता की आवाज़ है।" और राम भागते हुए जाते हैं। सभी राम के साथ जाते हैं और देखते हैं कि सीता के घर पर आग लग गई है।
​राम जी बिना डरे आग में कूद जाते हैं। सभी डरकर आग बुझाने की कोशिश करते हैं, तभी राम जी सीता को लेकर बाहर आते हैं।

​सीता और राम दोनों सुरक्षित थे। सभी पूछते हैं— "यह आग लगी कैसे?"

​सीता कहती हैं— "पता नहीं, अचानक से लगी।"

राम जी कहते हैं— "चलो कोई बात नहीं, अच्छा हुआ तुम ठीक हो।" और राम जी सीता को अपने घर ले जाते हैं।

                                           ​लेखक: न्यूसन साहू


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