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Kahaniyon Ki Duniyaa

Inspirational

3.8  

Kahaniyon Ki Duniyaa

Inspirational

डर से जीत तक

डर से जीत तक

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इस दुनिया में बहुत से लोग हैं, करोड़ों की जनसंख्या है। और इन करोड़ों में कोई भी लोग ऐसे नहीं जिसके अंदर भय ना हो। सबके अंदर किसी ना किसी चीज का भय ज़रूर होता है। किसी को आग का डर तो किसी के अंदर ऊंचाई का डर होता है। किसी को अपनो को खोने का भय डर, तो किसी को अपने करियर की चिंता है।

लेकिन किसी को यह नहीं पता कि उनका भय उनकी कमजोरी है। उनका असली दुश्मन उनका डर हैं। जो उन्हें अंदर से खोखला कर देता है। उनका भय उनका हल नहीं है, समाधान या कोई रास्ता नहीं है। 

लोगों के अपने भय को भगाना होगा और नेगेटिव के जगह पॉजिटिव सोच लानी होगी। वे जितना डरेंगे वो उतना ही कमजोर होंगे और उन्हें उतना ही उन्हें डर लगेगा।

यदि हमेशा सोचेंगे और डरेंगे कि हमारे करियर का क्या होगा, तो हमारे पास कुछ नहीं आएगा। हम किसी लायक नहीं रहेंगे। क्योंकि जितना हम डरेंगे हमारे मन में उतना ही नेगेटिव रूप आएगा।

अच्छा बताओ, हम में से कितने लोग अपने रिश्ते की हैं? चिंता करते हैं अपने प्यार को खोने से डरते हैं, लेकिन क्या यह सही है? इससे हमारा प्यार हमारे पास हमेशा गुलाम के तरह रहेगा।

नहीं, ऐसा नहीं है। हमें प्यार तो करना चाहिए, लेकिन हमें विश्वास होना चाहिए। जहाँ विश्वास नहीं, वहाँ प्यार नहीं। जहां विश्वास है वही प्यार है भय छोड़ो अगर वो तुम्हारा है, तो वो तुमारे पास खुद आएगा।

भय हल नहीं, हमारा दुश्मन है। दुनिया में जो होना है, वो होकर ही रहेगा। लेकिन हमें डरना छोड़ना पड़ेगा। मुश्किलें दरकर खुद पीछे हटेगी। लेकिन आजकल के लोगो को यह समझ ही नहीं आत। डरो मत, क्योंकि जहाँ भय है, वहाँ खतरा है। डर को अपने नसीब मत बनाओ, इसे अपनी जीत की पहेली सीढ़ी बनाओ। 

                                       लेखक — न्यूसन साहू


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