दिल कि दिवारें
दिल कि दिवारें
एक सिंगापुर नाम का गाँव था जिसमें एक लड़का रहता है जो सिंगापुर गाँव का राजा होता है, जिसका नाम रुद्रांश है। यह नाम रुद्रांश के पापा (पिता) ने रुद्रांश को दिया था क्योंकि रुद्रांश की मम्मी रुद्रांश को जन्म देने के कुछ घंटों बाद मर गई थी और उसके पापा भी कुछ दिन बाद गुंडों के हवाले होने वाले थे। यह बात उसके पिता को पता थी क्योंकि उसके पिता ने गुंडों से कर्जा ले रखा था और पाँच महीने तक उसे चुकाया नहीं था। इसलिए जन्म के अगले दिन उन्होंने रुद्रांश का नामकरण कर दिया। लेकिन कहते हैं न कि भगवान अपने भक्तों की हमेशा रक्षा करते हैं, वैसा ही इस कहानी में हुआ।
तो आइए जानते हैं कहानी के बारे में, पर उससे पहले कहानी के मुख्य किरदारों के बारे में भी जान लेते हैं।
कहानी के मुख्य पात्र (किरदारों के नाम):
1. जकलहलीन: पहला राजा
2. पी. पी. राय: रुद्रांश के पिता
3. मि. मीका राय: रुद्रांश की माँ
4. रुद्रांश: सिंगापुर का दूसरा राजा
5. वेदिका: रुद्रांश की पत्नी
6. विकलार: गाँव का सबसे बड़ा गुंडा
कहानी की शुरुआत होती है:—
बारिश का मौसम था। काले बादल छाए हुए थे, बिजली कड़क रही थी। सभी डरकर घर में चुप हुए होते हैं। एक घर के अंदर बच्चा रो रहा होता है। कोई उसकी मदद करने नहीं जाता, तभी गाँव के राजा श्री जकलहलीन वहां से महल की तरफ जाते हुए बच्चे की आवाज सुनते हैं। फिर वे घोड़े से उतरते हैं और कमरे में जाकर देखते हैं। "अरे! यह क्या? यह किसका बच्चा है? इतनी जोर से रो रहा है। कोई है? घर पे कोई है?" राजा चिल्लाते रहे पर कोई नहीं आया। तभी तेज हवा से खिड़की खुली और एक कागज़ राजा के पैर के पास आ पहुँचा ।
राजा ने कागज़ उठाया, खोला और पदा। कागज़ पर लिखा था: "मैं पी. पी. राय इस बच्चे का पिता हूं। इसकी माँ जन्म के कुछ घंटों बाद मर गई और मुझे गुंडे लेने आ रहे हैं, इसलिए कोई मेरे बच्चे का ध्यान नहीं रखना। बेचारा नाबालिग है, इसका नाम हमने रुद्रांश रखा है। बाय!" राजा की आँखों में आँसू आ जाते हैं और वे रुआँसे होकर कहते हैं, "हे भगवान! ना जाने इस बच्चे ने क्या किया था जो आपने इसे जन्म पर ही इतना दुःख दिया।" और फिर वे बच्चे को अपने महल ले जाते हैं।
राजा बच्चे को अपने पास रख लेता है और उसे अपने बच्चे की तरह पालता है। उसका ध्यान रखता है, उसे नहलाता है, खाना खिलाता है और सात साल के होने के बाद स्कूल भेजता है। बच्चा कुछ नहीं जानता था कि उसके असली माँ-बाप कौन हैं और वह महल में कैसे आया। उसे तो सिर्फ लगता था कि उसके असली पिता गाँव के राजा जकलहलीन हैं। उसे यह नहीं पता था कि माँ क्या होती है क्योंकि उसे कभी माँ का प्यार नहीं मिला।
धीरे-धीरे वह बड़ा हुआ और उसके व्यवहार बदलने लगे। वह दुनियादारी समझने लगा और बाहर घूमना चालू किया। उसका सपना गाँव की रक्षा करना और अपने दूसरे पिता जकलहलीन की तरह राजा बनना था। वह खुद को भगवान शिव का भक्त मानता था और रोज सूर्य देव को जल चढ़ाकर मंदिर जाता था। उसके पिता (जकलहलीन) उसकी इस बात से खूब प्रसन्न थे पर उन्हें रुद्रांश के बचपन की याद आती रहती। और फिर वे कुछ दिनों बाद रुद्रांश की शादी की बात तय करते हैं।
रुद्रांश को काफी सारी लड़कियाँ दिखाई जाती हैं, लेकिन वह सभी को साफ मना कर देता है। लेकिन जब एक दिन रुद्रांश मंदिर में पूजा करने जाता है, तब उसे एक लड़की दिखती है। उस लड़की ने लाल साड़ी पहनी थी और किस्मत से वह लड़की रुद्रांश के ऊपर गिर जाती है। दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखते हैं और पता नहीं एक पल में दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है।
रुद्रांश लड़की से उसका नाम पूछता है, "तुम्हारा नाम क्या है?" लड़की कहती है, "वेदिका, और तुम्हारा?" रुद्रांश कहता है, मेरा नाम रुद्रांश है।" और तब से दोनों अच्छे दोस्त बन जाते हैं और देखते-देखते कुछ महीने बीत जाते हैं। रुद्रांश की पढ़ाई खत्म हो जाती है और रुद्रांश सोचता है, "मुझे वेदिका को अपने दिल की बात बतानी चाहिए" और वह उसके घर चला जाता है। वेदिका भी रुद्रांश की तरह अकेली थी, उसके भी माँ-
बाप बचपन से नहीं थे।
रुद्रांश उसके घर पहुँचता है। कुछ देर तक वे बात करते हैं, फिर रुद्रांश अपने दिल की बात बताते हुए घुटनों पर बैठकर गुलाब का फूल देता है। वेदिका पहले शर्माती है, फिर शादी के लिए मान जाती है। जकलहलीन दोनों की शादी धूमधाम से खुशी-खुशी कराता है और दोनों पति-पत्नी बन जाते हैं। कुछ दिन बीत जाते हैं, दोनों खूब टाइम बिताते हैं। यह सभी बात गाँव के सबसे बड़े डॉन विकलार को पता चलती है।
"अरे! यह क्या? जिस बच्चे के माँ-बाप को मैंने मारा, वह बच्चा अभी तक बच गया और उसकी शादी भी हो गई? ऐसा नहीं हो सकता!" — विकलार ने कहा। विकलार अपनी गैंग के साथ महल जाता है। उसका मकसद तीन लोगों को मारना था: रुद्रांश, वेदिका और जकलहलीन।
वे महल पहुँचते ही हमला कर देता है। जकलहलीन यह देखकर डर जाता है और वह भी हमला करवाता है। यह सब देख रुद्रांश हैरान हो जाता है। तभी अचानक से विकलार उसके सामने आ जाता है और कहता है: "रुद्रांश, आज मैं तुझे, तेरी पत्नी और तेरे दूसरे पिता को मार डालूँगा !" रुद्रांश कहता है, "दूसरे पिता?" फिर विकलार बचपन की बात रुद्रांश को बताता है।
रुद्रांश गुस्से से लाल हो जाता है। "तेरी इतनी हिम्मत!" — यह कहकर वह लड़ने लगता है। दोनों में खूब लड़ाई होती है, तभी रुद्रांश की पत्नी वेदिका, विकलार के पेट में तलवार घुसा देती है। रुद्रांश और उसकी पत्नी जीत जाते हैं लेकिन जकलहलीन शहीद हो जाता है। रुद्रांश जकलहलीन का शुक्रिया करता है बचपन से लेकर अभी तक ध्यान रखने और असली माँ-बाप का पता न चलने देने के लिए।
अब रुद्रांश और उसकी पत्नी वेदिका दोनों महल में खुशी-खुशी रहते और महल के राजा-रानी बन जाते। सभी उनके हुकुम पर चलते। कुछ महीने बाद उनका एक बच्चा भी हो जाता है जिसका नाम वे 'रुद्र' रखते हैं।
संक्षेप (Summary):
कब क्या हो जाए किसी को नहीं पता चलता, इसलिए इंसान को अपना अच्छा कर्म करते रहना चाहिए। जैसे कहानी में कैसे रुद्रांश राजा के पास पहुँचता है, फिर उसे लड़की मंदिर पर मिलती है, उसे प्यार हो जाता है, शादी हो जाती है, फिर गुंडों का अचानक हमला होता है, फिर सच्चाई पता चलती है और उनकी जीत होती है।
शिक्षा: मुश्किलों से नहीं, कर्म से डरो। क्योंकि भगवान सबको देखते हैं और अपने भक्तों के साथ खड़े रहते हैं ।
लेखक - श्री न्यूसन साहु

