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Vivek Madhukar

Abstract Inspirational

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Vivek Madhukar

Abstract Inspirational

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी

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क्षणभंगुर हैं सभी कुछ तो !

कल था, आज नहीं

आज है, कल नहीं।


साँसें चल रही हैं तो ज़िंदा हैं,

ज़िंदा हैं तो ज़िन्दगी है,

और ज़िन्दगी है, तभी हैं

सारी भावनाएँ -

राग-अनुराग,

हास्य-रुदन,

प्रेम-घृणा,

मित्रता-शत्रुता।


थम जा ऐ मुसाफिर,

भाग मत,

थोड़ा दम तो ले।


लग ले गले,

हँस ले साथ दो घड़ी,

कर लेने दे मन को नर्तन।


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