STORYMIRROR

Renu kumari

Abstract Tragedy

4  

Renu kumari

Abstract Tragedy

ज़िन्दगी या प्यार

ज़िन्दगी या प्यार

1 min
218

उस रोज़ रात में कुछ इस कदर तन्हा बैठी थी 

की एक शख्स ने मुझसे वो बात कही 

जिंदगी जीना आसान है मेरी जान और प्यार करना मुश्किल 

कहने लगा तू ज़िन्दगी को चुनना उस प्यार को नहीं 

प्यार के हाथों तो वो परिंदे भी बर्बाद हुए है 

ज़िन्दगी के रास्ते कुछ मिले न मिले   

पर प्यार के रास्ते तो बस दर्द ही मिला है 

मैंने अपनी अश्कों में भीगी पलकें उठाई

और मुस्कराते हुए कहा 


अगर ज़िन्दगी ही जीनी होती तो 

मैं भी दुनिया की उस भीड़ का हिस्सा होती 

आज मेरी कविताओं में उस मोहब्बत का जिक्र न होता 

और मेरी मोहब्बत को ठुकराने वाला यूँ बेफिक्र न होता 

अगर फैसला करना ही है मुझे तो में प्यार को चुनूंगी 

जिंदगी जीने से लोग बस एक बार मरते है में प्यार कर हर रोज़ मरूंगी 

आसान रास्ता चुन लूँ वो मेरी फितरत नहीं  

और कोई मेरी मोहब्बत को नीलाम कर दे ऐसी कोई तिजारत नहीं 

कह दो उन लोगों से जिन्हें दिल तोड़कर सुकून मिलता है 

आजमा ले अपना हुनर मुझपर 

अब चाहे इस जमीं पे ख़ुदा आए या संग क़यामत लाए 

मैं प्यार से मिले हर दर्द को सहूंगी 

मुझे सिर्फ एक कतरा प्यार का चाहिए 

अब चाहे मौत क्यों न आए मैं जिंदगी नहीं प्यार को चुनूँगी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract