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kajal kishore

Tragedy

4  

kajal kishore

Tragedy

ज़िन्दगी की कलाएँ

ज़िन्दगी की कलाएँ

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बड़ी मुश्किलों भरे हैं ये रास्ते, काटे नहीं कटते हैं....जब भी लगता है कि ज़िन्दगी को मंज़िल मिल ही गयी है एक नया मोड़ शुरू हो जाता है...

लोग कहते हैं कि ज़िन्दगी किस्मत वालों को ही मिलती है पर उन्हें यह नहीं पता कि ज़िन्दगी तो सस्ती है सबको मिल ही जाती है कीमती तो मौत है लोग माँगते रह जाते हैं पर वो सिर्फ किस्मत वालों को ही मिलती है।

कुछ लोगों के लिए ज़िन्दगी का हर एक दिन खूबसूरत होता है और कुछ के लिए वो हर दिन अज़ाब सा होता है।

कुछ चाहते हैं कि ज़िंदगी का यह सुंदर सफर कभी खत्म ही न हो और कुछ इस ज़िन्दगी नाम की चीज़ से बस आज़ादी चाहते हैं।

काश की ज़िंदगी इतनी सुनदर होती कि मौत की ख्वाहिश ही न करते पर यहाँ तो आलम ऐसा है कि ज़िन्दगी इतनी बत्तर लगने लग गयी है कि जिस मौत शव्द को अपने ज़बान पर लाने से भी डर लगता था आज उसे ही पाने के लिए आंखे तरस सी गई है।

ज़िंदगी में कुछ लोगों की अहमियात उसी दिन खत्म हो जाती है जब उनकी बहुत ज़्यादा ज़रूरत महसूस हो पर ख्वाबों में तो छोड़िए खुली आँखों से देखने पर भी वो नज़र नहीं आते हैं।

कभी ऐसी ज़िंदगी सोची नहीं थी जैसी अभी जीनी पड़ रही है,लोग बुरा बोलते हैं ,इल्ज़ाम देते हैं और तो और ये मानते भी नही हैं कि उन्होंने कुछ कहा भी है।

पहले लगता था कि ज़िन्दगी अच्छी कटेगी पर अब लगता है कि एक दिन भी अगर शांति से गुज़र जाए तो बात ही कुछ और होगी।

लोगों के चेहरे की मुस्कुराहट और अपने चेहरे की खामोशी देख के दिल छील सा जाता है।

पहले तो लोग पीठ पीछे बातें किया करते थे, हँसते थे पर अब तो आलम ऐसा है कि बातें अभी भी होती हैं, लोग हँसते अभी भी हैं पर हमारे मुँह पर।

अब तो ज़िन्दगी की मुसीबतें , यहाँ तक कि ज़िन्दगी भी खत्म होने का नाम ही नहीं लेती है।


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