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Sachhidanand Maurya

Inspirational

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Sachhidanand Maurya

Inspirational

युद्ध की त्रासदी

युद्ध की त्रासदी

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रण क्षेत्र भर दम्भ

क्या हासिल होगा?

शापित तेरा दुष्कर्म

रक्तसिंचित मंज़िल होगा।(१)


मानव बना मानव भक्षी,

बात नहीं हरगिज अच्छी,

इतिहास साक्ष्य है दे रहा,

हिंसा की अहिंसा परिणिति।(२)


विकास नहीं विनाश किए हो,

मानव जन को नाश किए हो,

क्या पाया तुमने युद्धों से,

क्या कभी अहसास किए हो?(३)


विज्ञान ज्ञान का सदुपयोग हो,

चिकित्सा में इसका प्रयोग हो,

बने मानवता के सजग प्रहरी,

आपस मे हमारे ऐसा योग हो।(४)


देश गर्त में चला जाता,

पीढ़ियाँ कोसा करती हैं,

चीत्कारों से धरा विचलित,

काया काँपा करती है।(५)


आओ करें जय जय क्रांति,

दूर हों सबकी शक्ति भ्रांति,

प्रभु का पावन सन्देश सदा,

ॐ शान्ति: शांति: शांति: ।(६)



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