STORYMIRROR

दयाल शरण

Inspirational

3  

दयाल शरण

Inspirational

युद्ध भूमि

युद्ध भूमि

1 min
68

तो क्या हुआ

जो हारे हैं हम

यह युद्ध था

पर डिगे नहीं।


यह युद्ध 

अभिमानों से था

यह हार 

रजवाड़ों की थी

तो क्या हुआ

जो शत्रु जय

उनकी वृहद

बाहों में थी।


हारे हुए सैनिक का

अब मान क्या

अपमान क्या

आदेश था कि

यूद्ध कर

रण क्षेत्र से

डिगे नहीं

तो क्या हुआ

जो हार कर

रक्तिम हुए

रुके नहीं।


दुखता तो है

रुकता नहीं

अपमान से

कँपता नहीं

तो क्या हुआ

जो तंज हो

सूरज है यह

छिपता नहीं।


आओ कि 

मुझको दंड दो

जीते हो तुम

मुझे व्यंग दो

घायल हैं हम

टूटे नहीं

तो क्या हुआ 

तुम जो प्रचंड हो

सैनिक द्वंद से 

डरते नहीं।


तो क्या हुआ

जो हारे हैं हम

यह युद्ध था

पर डिगे नहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from दयाल शरण

Similar hindi poem from Inspirational