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Surendra kumar singh

Abstract

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Surendra kumar singh

Abstract

ये तो मुहब्ब्त की गली है

ये तो मुहब्ब्त की गली है

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खोये हुए थे ढूंढने में

दिल की धड़कन का अंदाज

सुना था एक दिल

सबके लिये धड़कता है

तभी और तभी

आंधी सी आयी तुम

उड़ा लायी यहाँ तक

यहाँ जहाँ हर दिल में

अपनी अपनी धड़कन है

ये बात और है लोग बंधे हुए हैं

एक दूसरे से

घुले हुए हैं जीवन में

किसी एक ख़याल से

ख्याल भी एक दूसरे का

अपनी तरह

अलग अलग अंदाज में

ठीक कहते हो तुम

ये मुहब्ब्त की गली है

और यह एक आजाद विश्व है।


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