ये सिपाही वतन के
ये सिपाही वतन के
ये सिपाही वतन के इन पे सबको है नाज़ ।
ये चले है बचाने मां भारत की लाज ।।
मौत का हो सफ़र दुश्मनों की नज़र ,
वीर होते नहीं भयभीत यहां
ध्वज फहराएंगे सीना ताने सभी
गाए ख़ुशी के मिल गीत यहां ।
काफ़िला जो बदा हिम्मतें भी बढ़ी
जलजला मौत का ये उठा देखो आज ।
ये सिपाही वतन के इन पे सबको है नाज़ ।।
सर पे बांधे कफ़न मौत का हो सपन
सर गैरों के आगे झुके ना कभी
मंज़िल दूर सही पथ कांटों के हो
फिर भी बढ़ते क़दम ये रूके ना कभी
आज टकराएंगे बारूद बरसाएंगे
मौत की दुश्मनों पे गिरेगी ये गाज ।
ये सिपाही वतन के इन पे सबको है नाज़ ।।
ये पुजारी अमन के सिपाही वतन के
ख़ून इनकी रगों में अब चढ़ने लगा
ख़ून देंगे मगर आजादी ये नहीं
बिगुल आजादी का यारों बजने लगा
शहीद हो जाएंगे इस वतन के लिए
गौरव गाथा भी गाएगा इनकी समाज ।
ये सिपाही वतन के इन पे सबको है नाज़ ।।
