STORYMIRROR

Bherusingh Chouhan

Abstract

4  

Bherusingh Chouhan

Abstract

आई दीवाली

आई दीवाली

1 min
249

घर आंगन में दीप जलाएं 

मिलकर मम्मी पापा आज,

धूम धड़ाका दीवाली का

आज खुशियों का है राज।


कोई लाया बम पटाखा

और लाया कोई फ़ूल झड़ी,

कोई अनार रामबाण तो

और लाया कोई सूर सूरी।


खूब खाए खील बताशे

लक्की भर भर जेब,

स्वीटी खाए ख़ूब मिठाई 

और हर्षम खाए सेव।


जले दिलों में दीप निराला 

दूर अंधेरा हो मन का,

मनाएं दीवाली मिलजुल कर 

मिले आनंद इस जीवन का।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract