STORYMIRROR

Navin Madheshiya

Drama

3  

Navin Madheshiya

Drama

ये कैसी होली

ये कैसी होली

1 min
245

होली की गुलाल उड़ी

जिनके घर फिके थे

ना जाने कौन सी हवा चली

होली की गुलाल उड़ी।


जिनके आंगन में 

चावल का एक दाना ना था

क्या उनके आंगन में

पूआ गुलाल सजी

होली की गुलाल उड़ी।


बिसराई रही खुशियाँ जिनसे

उन मुरझाई चेहरो पर 

क्या इतराई खुशियां चढ़ी

ये कैसी गुलाल उड़ी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama