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मिली साहा

Inspirational

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मिली साहा

Inspirational

ये दुनिया नहीं किसी की

ये दुनिया नहीं किसी की

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आंँख मूंदकर न विश्वास कर यहाँ किसी पर भी,

सुन मुसाफिर ये दुनिया नहीं है, किसी की सगी,


कदम कदम पर धोखे के व्यापारी, बैठे हुए यहाँ,

कदम कदम पर हर मोड़ पर होती दिल की ठगी,


चेहरे पर इतने चेहरे की असलियत दिखती नहीं,

अंदर चालाकी भरी हुई ऊपर से दिखती सादगी,


ना रहना इस भ्रम में कि मुखौटा पहचान पाएगा,

तेरा प्रत्येक प्रयास होगा तेरी ही किस्मत की ठगी,


झूठे ख़्वाब, झूठे वादों की तस्वीर दिखाकर लोग,

हर लम्हा ज़ख्मों से भर देते हैं, भविष्य की छवि,


शराफ़त का फायदा उठाना, फितरत दुनिया की,

दिल में कपट और जुबां पे रहती है मिठास घुली,


अपने ही तो यहांँ अपनों को पिलाते मीठा ज़हर,

तो फिर बढ़-चढ़कर बात, क्यों करें हम गैरों की,


जिसे सुनाओ दिल का हाल वही उठाते फायदा,

धोखा देने वाली क्या समझे कीमत जज़्बात की,


दुनिया तो वैसे भी भागती झूठ, दिखावे के पीछे,

सच्चाई और अच्छाई ही तो सदैव चढ़ती है बलि,


मत बांध तू उम्मीद के धागे, इस दुनिया के साथ,

डूब जाएगी बीच मझधार, नाव तेरे उम्मीदों की,


दुनिया की किसी बात में ना आना ऐ दिल कभी,

खुलेआम नज़रों के सामने होती है दिल की ठगी,


मत चल उस राह तू जो ये दुनिया तुझे दिखाएगी,

क्योंकि दुनिया कभी नहीं होती, किसी की सगी।


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