ये दुनिया है रंगमंच
ये दुनिया है रंगमंच
ये दुनिया है रंगमंच यहां हर कोई एक कलाकार है,
हम सबका इस रंगमंच पर अलग-अलग किरदार है,
कोई नहीं जानता यहां कब किसका क्या किरदार होगा,
हम तो हैं कठपुतलियां ईश्वर कब किसकी डोर खींचेगा,
जिंदगी हमसे जीवन भर कठपुतली का खेल करवाती है,
और प्रकृति दर्शक बन हमारे हर नाटक का मजा लेती है,
इस रंगमंच पर चेहरों पर भी कितने चेहरे लगे होते हैं,
दिल में दर्द और चेहरे पर मुस्कान की चादर ओढ़े रहते हैं,
कोई झूठा होकर भी अपनी सच्चाई का दम भरता है,
तो कोई सच्चा होकर भी झूठ की धुंध में छुप जाता है,
यहां कभी किसी की जीत तो किसी की हार होती है,
कभी दुखों का मेला तो कभी खुशियों की दीवाली होती है,
किरदार निभाते वक्त कई बार कष्टों से गुजरना पड़ता है,
दुनिया के इस रंगमंच में पल पल सबका रूप बदलता है,
यहां जो जैसा किरदार निभाता है वैसा ही उपहार पाता है,
हम कैसा करते हैं प्रदर्शन यह हम पर ही निर्भर करता है
शैशवावस्था से वृद्धावस्था तक अभिनय चलता रहता है,
और अपना-अपना खेल दिखाकर हर कोई चला जाता है।
