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Mukesh Bissa

Abstract

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Mukesh Bissa

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यादों के पन्ने

यादों के पन्ने

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यादों के पन्ने 

यादों के पन्ने पलटते हैं

थोड़े अच्छे थोड़े बुरे

बीते पल याद आते हैं।


थोड़े अच्छे थोड़े बुरे

भूत काल आंखों में छाता है

यादों के पन्ने पलटते हैं

थोड़े अच्छे थोड़े बुरे

जीवन की आपाधापी

चलती रहती है अविरल

जीवन धारा चलती रहती है।


विश्राम का नाम नहीं

यादों के पन्ने पलटते हैं

थोड़े अच्छे थोड़े बुरे

इस सफर में आराम कहाँ

है विराम पूर्ण अंत में

गतिमान हमेशा रहना है।


बस चलते ही जाना है

यादों के पन्ने पलटते हैं

थोड़े अच्छे थोड़े बुरे

अतीत का चित्र उभरता है

कुछ बीता हुआ दिखता है।


स्मृति धूमिल नहीं होती है

बदलाव जिंदगी में आता है

यादों के पन्ने पलटते हैं

थोड़े अच्छे थोड़े बुरे।


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