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Pinki Khandelwal

Abstract

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Pinki Khandelwal

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यादों का पिटारा...।

यादों का पिटारा...।

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भाई की गोदी मानो जन्नत मिल गई,

अब तो आंखें देखने को तरस जाती है उन्हें,

वो बचपन की शरारतें और दोस्तों का साथ,

भाई का लाड़ प्यार और दुलार,

पानी में चलना और छप छप करना,


सचमुच वो पल सब आंखों के सामने आ गये,

जब देखी ये पेंटिंग वो यादें ताजा हो गई,

पल थे सुहाने जो अब यादों में जिंदा है,

अब कहां भाई की गोदी कहां दोस्तों का साथ,


बस यादें हैं और यादें बन रह जाएगी,

बचपन कहां फिर लौट कर आएगा,

बस वो किस्से कहानियों तक सिमट कर रह जाएगा,

चलो थोड़ी देर सही वो बचपन के दिन याद आ गये,


बिताए दोस्तों के साथ वो पल फिर आंखों के सामने आ गये,

वो गोदी के लिए झगड़ना और भाई का लाड़,

आज फिर मुझे बचपन की तरफ खींच ले गया,


उफ़...क्या तारीफ मैं आपकी पेश करूं,

उन दिनों की याद जो पेंटिंग में दिखलायी है,

सचमुच बेशुमार तारीफ के काबिल है,

पता नहीं कहां तक उचित समझ पायी छुपे उस संदेश को,

पर बचपन के दिनों की यादें फिर से ताजी हो गयी।


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