वतन की रूह बन जाऊँ !
वतन की रूह बन जाऊँ !
तेरी तरक्की की दीवार की ईंट बन जाऊँ !
तेरे फूलों के गुलिस्ताँ की महेक बन जाऊँ !
जहा भी बहु आखिर में आ के तुमसे मिल जाऊँ !
ए वतन मैं तेरी रूह बन जाऊँ !
तेरी वीरताकी सच्चाई का सच बन जाऊँ !
तेरी मोहब्बत की ग़ज़ल का शेर बन जाऊँ
जो भी करुँ, हर कोशिश तेरे लिए कर जाऊँ !
ए वतन मैं तेरी रूह बन जाऊँ !
तेरी नदियों में बहता जल बन जाऊँ !
तेरी हिमालय की चोटी का ताज बन जाऊँ !
जितना भी लहू है जिस्म में सब तेरे नाम कर जाऊँ !
ए वतन मैं तेरी रूह बन जाऊँ !
तेरे यहाँ की पेड़ो की जड़ बन जाऊँ
तेरे तिरंगे में लगने वाला रंग बन जाऊँ !
जितने भी लम्हे हैं बचे सब तेरे लिए जी जाऊँ !
ए वतन मैं तेरी रूह बन जाऊँ !
तेरी फलद्रुप मिट्टी का कण बन जाऊँ !
तेरे लहलाहते खेतो की फसल बन जाऊँ !
जितनी भी कहानी हो तेरी, सबका किरदार बन जाऊँ !
ए वतन मैं तेरी रूह बन जाऊँ !
तेरे यहाँ होनेवाली बारिश की बून्द बन जाऊँ !
तेरे यहाँ की हर माँ की ममता बन जाऊँ !
जो भी हासिल करुँ भारत माँ,
उसपे तुम्हारा नाम लिख जाऊँ !
ए वतन मैं तेरी रूह बन जाऊँ !
