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Burhan kadiyani .

Abstract Inspirational

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Burhan kadiyani .

Abstract Inspirational

वतन की रूह बन जाऊँ !

वतन की रूह बन जाऊँ !

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 तेरी तरक्की की दीवार की ईंट बन जाऊँ !

 तेरे फूलों के गुलिस्ताँ की महेक बन जाऊँ !

 जहा भी बहु आखिर में आ के तुमसे मिल जाऊँ !

 ए वतन मैं तेरी रूह बन जाऊँ !


तेरी वीरताकी सच्चाई का सच बन जाऊँ !

तेरी मोहब्बत की ग़ज़ल का शेर बन जाऊँ 

जो भी करुँ, हर कोशिश तेरे लिए कर जाऊँ !

ए वतन मैं तेरी रूह बन जाऊँ !


तेरी नदियों में बहता जल बन जाऊँ !

तेरी हिमालय की चोटी का ताज बन जाऊँ !

जितना भी लहू है जिस्म में सब तेरे नाम कर जाऊँ !

ए वतन मैं तेरी रूह बन जाऊँ !


तेरे यहाँ की पेड़ो की जड़ बन जाऊँ 

तेरे तिरंगे में लगने वाला रंग बन जाऊँ !

जितने भी लम्हे हैं बचे सब तेरे लिए जी जाऊँ !

ए वतन मैं तेरी रूह बन जाऊँ !


तेरी फलद्रुप मिट्टी का कण बन जाऊँ !

तेरे लहलाहते खेतो की फसल बन जाऊँ !

जितनी भी कहानी हो तेरी, सबका किरदार बन जाऊँ !

ए वतन मैं तेरी रूह बन जाऊँ !


तेरे यहाँ होनेवाली बारिश की बून्द बन जाऊँ !

तेरे यहाँ की हर माँ की ममता बन जाऊँ !

जो भी हासिल करुँ भारत माँ,

उसपे तुम्हारा नाम लिख जाऊँ !

 ए वतन मैं तेरी रूह बन जाऊँ !


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