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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

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Vijay Kumar parashar "साखी"

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वृक्ष

वृक्ष

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वृक्ष दिलदार होता है

ये सच्चा यार होता है

नहीं देता है,

ये किसी को धोखा


ये सच्चा प्यार होता है

वृक्ष दिलदार होता है

बिना स्वार्थ कोई

मदद करता नहीं


बिना स्वार्थ हम पर,

कोई मरता नहीं

वृक्ष तो परोपकारी का,

एक हार होता है


ख़ुदा के बाद, वृक्ष ही,

निःस्वार्थता का

सच्चा श्रृंगार होता है

इस ज़माने को छोड़


वृक्ष से तू नाता जोड़

वृक्ष यारों का यार है,

टूटे शीशे से भी वो,


जिंदादिली का

चमत्कार होता है

वृक्ष दिलदार होता है

ये सच्चा यार होता है।


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