STORYMIRROR

पं.संजीव शुक्ल सचिन

Tragedy

3  

पं.संजीव शुक्ल सचिन

Tragedy

वृक्ष की महत्ता

वृक्ष की महत्ता

1 min
204

पादप को काटकर, जीवन को छांट कर,

अपने ही पथ पर, शूल तुम बो रहे।

फल फूल देने वाले, विष छीन लेने वाले, 

तरू प्राण वायु वाले, खुद से ही खो रहे।

विटप बिना ये जीवन, लगे जैसे विष बेल,

शाखी काट काट कर, नियति को धो रहे।।

स्वास आस सभी गाछ, खिले जिनसे ये बाछ,

पहचान भावी को भी, आज तुम सो रहे।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy