STORYMIRROR

Shipra Verma

Inspirational

2  

Shipra Verma

Inspirational

वक़्त की गर्दिश

वक़्त की गर्दिश

1 min
212

पल पल ढलते वक़्त की

गर्दिश में बैठे हैं हम

हाथों में क्या कर लें क़ैद

वक़्त की गुस्ताखी को हम?


यही वक़्त था नाज़ हमे था

कभी खुद पर कभी उस पर

आज मगर इस सच्चाई के

रूबरू हो ही गये हैं हम ।


नहीं अमर है आन बान और

शान तुम्हारी सुन ले वक़्त,

तू भी एक दिन गर्दिश में

मिट जाएगा हमेशा के लिये वक़्त।।








विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational