वो सबसे जुदा वो दीवानी सी
वो सबसे जुदा वो दीवानी सी
मेरे दिल में उसका ठिकाना
दूर मुझे ना जाना
वो सबसे जुदा वो दीवानी सी
परियों की वो कहानी सी
अलग सी उसमे बात
अंदाज़ उसका जरा है खास
उसे देख कर गुलशन खिला
मुस्कान से उसकी इन्द्रधनुष को
भी रंग है मिला
उसकी खिलखिलाहट बहते झरने सी
जब वो जोर से हंसने लगती है
आसमां से से जैसे बूंदे बरसती है
सादगी से उसकी बहारों को रंगत देती
अनोखी अदाएं दीवानी से जैसे हवाएं
फिज़ाओं को वो महकाती
कुछ ऐसे वो मुस्कुराती
वो मनचली तितली सी
कोमल मासूम वो कली सी
जिस राह वो चले
खुशियां वहीं मिले।

