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Kavya Soni

Romance

4  

Kavya Soni

Romance

प्रेम

प्रेम

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प्रेम कहा अल्फाजों में बंध पाए

ना इसकी भाषा ना बोली

कैसे कोई प्रेम की परिभाषा 

समझा पाए

प्रेम सच्चा हो तो हर मंज़र

प्यारा नजर आए

प्रेम ना शब्दों में समाए

प्रेम का हर रंग गहरा

प्रेम का हर दिल पर पहरा

फिज़ाओं में प्रेम की महक आए

पतझड़ भी बहार बन जाए

कहीं प्रेम विश्वास बन जाए

हो जुदाई तो प्रेम से नाराजगी जताए

कहीं प्रेम में आस है

कभी दूरी का अहसास है

कोई प्रेम में हो जाता निराश

कहीं निगाहों में प्रेम की प्यास

एहसासों का ये नाता

बस दिल ही इसे समझ पाता

समझे तो बड़ी सरल प्रेम की परिभाषा

जो ना समझ पाए उसे प्रेम बड़ा उलझता


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