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Kavya Soni

Romance

4  

Kavya Soni

Romance

इश्क

इश्क

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इश्क पर जोर नहीं किसी का

लाख पहरे हो 

इश्क हवा बन छा जाता है

इश्क फूलो कि महक सा

फिज़ाओं मे घुल जाता है


पानी सा इश्क दरारो से रिसकर मिल ही जाता है

इश्क है पीपल सा जो कहीं भी उग जाता

इश्क आसमां के उस चांद सा

पूरा हो कर भी प्यारा 

अधूरा हो तब भी खूबसूरत नजर आता है

इश्क समन्दर सा खुशियों ओर सुकून के


मोती दे जाता

इश्क चंचल नदिया सा सागर मिलन की तड़प मे

बहता जाता

इश्क रूह सा जिस्म कर जर्रे जर्रे मे बस जाता

इश्क वो गुलाब सा महक ना छोड़ पाता

इश्क तेरे एहसासों सा जिसमे अक्स मेरा होता

इश्क मेरी धड़कन सा जिसमे तू बस तू ही होता है


इश्क आइने सा चेहरा तेरा ही नज़र आता है

इश्क शीशे सा रुसवाई से टूट जाता

इश्क विशाल बरगद सा जो बस फैलता जाता

इश्क आसमां सा ख्वाबों के सितारे सजाता

इश्क ज़मी सा ख़्वाबों के जहां को थामे रखता


इश्क मासूमियत सा जो छल नहीं करता

इश्क इबादत सा जो शक ओर सवाल मे उलझता

इश्क अनमोल सा किसी सूरत में नहीं बिकता

इश्क आजाद सा कैद नहीं करता 

इश्क की ना कोई सीमा ना हद

इश्क बस बेपनाह ओर बेहद

इश्क की ना भाषा ना परिभाषा

इश्क बस इश्क होता है।


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