कल्पना 'खूबसूरत ख़याल'
Classics
दिशाओं के
चेहरे पढ़ता हुआ
और हवाओं की साँसों
को गिनता हुआ
वसन्त आने
की बाट जोहता
एक फूल
भूल गया ये
बात की उसका
वसन्त तो बस
तुम्हारे ज़ुल्फ़ों में
ही बसता है
जब धरती पर
सब कह रहे कि
वसन्त आ गया
वो फूल कैसे
माने की वसन्त
आ गया।
वसन्त
वो फूल
मधुमास
कहो प्रिये
लो आ गया बसन्...
वसन्त मुस्कुर...
खुशियों का बस...
बसन्त
सखी आयो रे बस...
भारत के स्वर्णिम इतिहास की तुम गौरव गाथा हो गए गिर धरती माँ के आंचल में तुम आसमानी हो भारत के स्वर्णिम इतिहास की तुम गौरव गाथा हो गए गिर धरती माँ के आंचल में तुम ...
एक अच्छा नागरिक एक नेक इंसान में कहीं न कहीं होती है गुरु की पहचान। एक अच्छा नागरिक एक नेक इंसान में कहीं न कहीं होती है गुरु की पहचान।
पुत्रों के लिए जैसे मैं रोती वैसे रोयेगी इसकी माँ भी ! पुत्रों के लिए जैसे मैं रोती वैसे रोयेगी इसकी माँ भी !
खाली टोकरी उठाकर घर की ओर चल पड़ीआज उम्मीद ना होते हुए भी उसका माल सही दामों में बिक चुक खाली टोकरी उठाकर घर की ओर चल पड़ीआज उम्मीद ना होते हुए भी उसका माल सही दामों में ...
श्री रघुवीर के मन में आया यज्ञ किये मैंने बहुत से अशवमेघ यज्ञ अब करूँ मैं । श्री रघुवीर के मन में आया यज्ञ किये मैंने बहुत से अशवमेघ यज्ञ अब करूँ मै...
कलयुग में मानसिक पुण्य हैं कलयुग में मानसिक पुण्य हैं
विदुर जी पूछें मैत्रेय जी से स्वयंभुवमनु का चरित्र सुनाएँ ! विदुर जी पूछें मैत्रेय जी से स्वयंभुवमनु का चरित्र सुनाएँ !
गिर धरती माँ के आंचल में तुम आसमानी हो गए । गिर धरती माँ के आंचल में तुम आसमानी हो गए ।
तुम्हारे लिये अपने दिल का एक एहसास लिख रहा हूँ। तुम्हारे लिये अपने दिल का एक एहसास लिख रहा हूँ।
ब्रह्मा जी कहें प्रभु मैंने आपको बहुत समय के बाद है जाना ! ब्रह्मा जी कहें प्रभु मैंने आपको बहुत समय के बाद है जाना !
दसरथ घर बाजे बधाई, कौशल्या कैकेई सुमित्रा वातशल्य में निहाल, जनम लियो अयोध्या में युग दसरथ घर बाजे बधाई, कौशल्या कैकेई सुमित्रा वातशल्य में निहाल, जनम लियो अयोध्या...
इतिहास और पुराण जो हैं वो पांचवां वेद हैं कहलाएं ! इतिहास और पुराण जो हैं वो पांचवां वेद हैं कहलाएं !
सुनकर प्रश्न मैत्रेय जी बोले करूँ आरम्भ मैं भागवत पुराण का ! सुनकर प्रश्न मैत्रेय जी बोले करूँ आरम्भ मैं भागवत पुराण का !
है सौगंध तुम्हें नहीं भूलेंगे, देश की हो सच्ची पहचान। है सौगंध तुम्हें नहीं भूलेंगे, देश की हो सच्ची पहचान।
सृष्टि के प्रारम्भ में प्रसन्न करें ब्रह्मा इसी धारणा से श्री हरि को! सृष्टि के प्रारम्भ में प्रसन्न करें ब्रह्मा इसी धारणा से श्री हरि को!
ब्रह्मा जी ने जब अंधकार का कारण बताया सब देवताओं को ! ब्रह्मा जी ने जब अंधकार का कारण बताया सब देवताओं को !
माता पिता जब चले गए तो देवहूति सेवा करें कर्दम की ! माता पिता जब चले गए तो देवहूति सेवा करें कर्दम की !
मन से पढ़ता, सुनता जो है सबको सुख ये देती है। मन से पढ़ता, सुनता जो है सबको सुख ये देती है।
ईश्वर एक है, रूप अनेक हैं । धर्म एक है, स्रोत अनेक हैं। ईश्वर एक है, रूप अनेक हैं । धर्म एक है, स्रोत अनेक हैं।
दाढ़ों की नोक पर पृथ्वी ला रहे वराह भगवान को देखा था वहां। दाढ़ों की नोक पर पृथ्वी ला रहे वराह भगवान को देखा था वहां।