खुशियों का बसन्त
खुशियों का बसन्त
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गिर गए सूखे पत्ते
झूम उठे सब बच्चे
नाच रहे पेड़ पौधे
खुशियाँ मनाइये
ह्रदय में तरंग है
जीवन में उमंग है
मौसम भी मलंग है
सब गीत गाइये
ऋतुराज आया यहाँ
खुशहाली लाया यहाँ
धरा सरसों खिली है
बसन्त मनाइये
कली-कली मंडराए
भँवरा गया बौराये
फसलें लहलहाएँ
आप मुस्कुराइएँ।
