STORYMIRROR

Rashmi Sthapak

Inspirational

4  

Rashmi Sthapak

Inspirational

वो खेतों में काम करने वाली

वो खेतों में काम करने वाली

1 min
347


उसने सूरज को

निकलते देखा है

उसने आसमान का रंग

बदलते देखा है 

नर्म हवा को छूकर

भोर के चांद को 

विदा किया है

पंछी,हवा,पानी,

खुशबू को

जी भर के जिया है

अपने जीव को खुद से

रूह जैसा सिया है 

वो बादलों को लपेटकर

बूँदों को झेलती है

वो बाँधकर पल्लू से

मस्त हवा को खेलती है

स्वेद कणों का गहना

पहनती है वो

धूप को ओढ़कर

दर्द खर्च कर देती है सब

कुछ नहीं रखती जोड़कर

बनाकर मुसीबतों का 

सिराहना

वो खो जाती है 

सपने उसकी राह देखते हैं

और 

वो सो जाती है

वो खेतों में काम करने वाली

इसे अपना नसीब कहती है

आराम से भरी, 

ग़म से डरी दुनिया 

उसे ग़रीब कहती है .......।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational