वो दिन भी कितने अच्छे थे
वो दिन भी कितने अच्छे थे
मिलकर मधुर सुर लहरी में
गीत धरा के गाते थे।
वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम स्कूल को जाते थे।
मनमौजी थे, बेफिक्र इतने
रात को देखते थे सपने
सुबह हमें उठने को
जब-जब माताजी कहतीं थीं
हम फिर रजाई ओढ़-ओढ़
लम्पसार सो जाते थे
वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम स्कूल को जाते थे।
पीठ में बस्ता हाथ में थरमस
नजरें होतीं हमपे बरबस
रूक जाने को कहता कोई जब
हम दौड़ लगाते थे तब-तब
सीमा, गुड्डू, नीरू, नीमा तो
देख हमें रो जाते थे।
वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम स्कूल को जाते थे।
गुरूजी पढ़ाते, हम पढ़ते
इंटरवल में जमकर लड़ते
धक्का-मुक्का खींचम-खिंचाई
हमने की जब लाइन लगाई
वापस घर आते ही हम
घर से गायब हो जाते थे
वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम स्कूल को जाते थे।
अड्डू-पिड्डू, छुप्पन-छुपाई
गुल्ली-डंडा हवा-हवाई
अकड़म-बकड़म बंबे बो
धमाचौकड़ी संडे को
ना टेंशन ना कोई गम
बस अपने में खो जाते थे।
वो दिन भी कितने अच्छे थे
जब हम स्कूल को जाते थे।।
