STORYMIRROR

Ira Johri

Abstract

3  

Ira Johri

Abstract

वक्त

वक्त

1 min
226

वक्त होता उसी का ग़ुलाम,

करता जो समय पर हर काम।


समय का पहिया कभी ना रुकता,

कहता जीवन है चलने का नाम।


जनम तेरा है अनमोल साथियों,

बनना ना कभी किसी का ग़ुलाम।


बुरी संगत से भी रहना दूर सदा,

वरना भूल जाओगे सब गुलफाम।


कुछ भी छिपा नहीं सकते “इरा”उससे,

ऊपर से देख रहा हम सबका निज़ाम।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract