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Dr. Nidhi Priya

Inspirational

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Dr. Nidhi Priya

Inspirational

वक्त मरहम है...

वक्त मरहम है...

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वक्त मरहम है हर तरह के ज़ख्मों का
दिल के नासूर हों या तन पे कोई घाव लगे
ढल जाती है हर शाम बदल जाता है मौसम 
चाहे तूफान कितना गहरा या नायाब लगे

आज ऑंखों में ऑंसू बन जो खटका है
कल वहीं गुजरा हुआ इक ख़्वाब लगे
पलटकर देखा है जिंदगी के पन्नों को
कड़वा तजुर्बा भी एक दिन लाजवाब लगे 

वक्त की फितरत है ये ठहरता नहीं कभी
खुशियाॅं रस्ते में हों या गम का सैलाब लगे
ये जो अंधेरा है वो भी सिमट जाएगा 
कि हर काली रात के किनारे पे आफताब लगे

जो सब्र रख ले, मुस्कुराकर सीख ले जीना
ये जिंदगी का सफर फिर से कामयाब लगे 
मुश्किलों से डर के न राह बदल नजरिया ले बदल
कि हर काॅंटा भी तुझे गुलशन का गुलाब लगे


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