Rajni Chaurasiya
Classics
कश्ती हैं पुरानी मगर दरिया बदल गया
मेरी तलाश का भी तो जरिया बदल गया...
ना शक़्ल बदली, ना ही बदला मेरा किरदार
बस लोगों के देखने का नज़रिया बदल गया।
वक्त बदल गया
इश्क नहीं तुम...
हाले -दिल
तुम थी तो ।
कुछ न कुछ जरू...
कुछ तो था ....
दर्द दोनों क...
प्यार
सबको गले लगा ...
आखरी पल
तब उसे लाकर उनको दे दिया यह वितथ ( भरद्वाज ) ही भरत का दत्तक पुत्र हुआ। तब उसे लाकर उनको दे दिया यह वितथ ( भरद्वाज ) ही भरत का दत्तक पुत्र हुआ।
रथ में रावण था अगले दिन तेज चले जो पवन समान। रथ में रावण था अगले दिन तेज चले जो पवन समान।
ये वचन सुनकर बलि के उनसे कहने लगे प्रभु वामन। ये वचन सुनकर बलि के उनसे कहने लगे प्रभु वामन।
माया मोह से पीछा छूटे और भक्ति और ज्ञान मिल जाये! माया मोह से पीछा छूटे और भक्ति और ज्ञान मिल जाये!
माता यशोदा और रोहिणी जी का हृदय उमड़ रहा वात्सल्य स्नेह से माता यशोदा और रोहिणी जी का हृदय उमड़ रहा वात्सल्य स्नेह से
कर्ण भी महान है'उसकी गाथा भी महान है पिता भी महान है' उनका तेज भी महान है। कर्ण भी महान है'उसकी गाथा भी महान है पिता भी महान है' उनका तेज भी महान है।
रिश्तों से मिलकर ही बन जाते हैं, तभी तो यह रंग जीवन के कहलाते हैं। रिश्तों से मिलकर ही बन जाते हैं, तभी तो यह रंग जीवन के कहलाते हैं।
नारद जी कहें, हे राजन यवनराज की आज्ञा लेकर सेना ले कालकन्या और प्रज्वार! नारद जी कहें, हे राजन यवनराज की आज्ञा लेकर सेना ले कालकन्या और प्रज्वार!
राजा जिसका नाम रहूगण पालकी में कहीं जा रहा था! राजा जिसका नाम रहूगण पालकी में कहीं जा रहा था!
शौनक जी कहते हैं सूत जी शिरमोर आप वक्ताओं के अंधकार में पड़े हुए लोगों को परमात्मा का साक्षात्कार कर... शौनक जी कहते हैं सूत जी शिरमोर आप वक्ताओं के अंधकार में पड़े हुए लोगों को परमात्...
अहिरावण कहे हनुमान को ढीठ बहुत तुम, लगे न डर। अहिरावण कहे हनुमान को ढीठ बहुत तुम, लगे न डर।
बाकी भी जो वानर और रीछ हैं पकड़ो और उन्हें तुम खा लो बाकी भी जो वानर और रीछ हैं पकड़ो और उन्हें तुम खा लो
नाम विदर्भ था उसका, उसीसे भोज्य का विवाह हुआ था। नाम विदर्भ था उसका, उसीसे भोज्य का विवाह हुआ था।
इच्छा मन में कृष्ण के दर्शन की पर कंस के डर से वहां जा न सके। इच्छा मन में कृष्ण के दर्शन की पर कंस के डर से वहां जा न सके।
क्षय तृतीया को ही वृंदावन में श्रीबिहारीजी के चरणों के दर्शन वर्ष में एक बार ही होते है क्षय तृतीया को ही वृंदावन में श्रीबिहारीजी के चरणों के दर्शन वर्ष में एक बार ही ...
एक साथ मिलकर सभी फिर गुणों का गाण करें कृष्ण के। एक साथ मिलकर सभी फिर गुणों का गाण करें कृष्ण के।
क्योंकि उनके पिता दक्ष ने शिवजी से प्रतिकूल आचरण किया। क्योंकि उनके पिता दक्ष ने शिवजी से प्रतिकूल आचरण किया।
क्योंकि चित में निरावरण एक अद्वितीय आत्मा मैं। क्योंकि चित में निरावरण एक अद्वितीय आत्मा मैं।
सूत जी कहें, शौनकादि ऋषियों इस प्रकार मार्कण्डेय मुनि ने अनुभव किया योगमाया वैभव का और फिर निश्च... सूत जी कहें, शौनकादि ऋषियों इस प्रकार मार्कण्डेय मुनि ने अनुभव किया योगमाया व...
कुछ ऐसे काम भी है जमाने में जो बेटे कर सकते है वो बेटी नही कर सकती। कुछ ऐसे काम भी है जमाने में जो बेटे कर सकते है वो बेटी नही कर सकती।